हिमाचल प्रदेश मंत्रिमंडल ने पर्यटन और आतिथ्य उद्योग को नई गति देने के लिए सोमवार को एक बड़ा निर्णय लिया। बैठक में मुख्यमंत्री स्टार्टअप योजना शुरू करने को मंजूरी दी गई है। इस योजना का मुख्य उद्देश्य प्रदेश के मूल निवासियों को स्वरोजगार के अधिक अवसर उपलब्ध कराना है। इसके तहत नए होम स्टे बनाने या पुराने होम स्टे को बेहतर सुविधाओं से लैस करने के लिए ऋणों पर ब्याज में राहत दी जाएगी। सरकार का मानना है कि इससे पर्यटन क्षेत्र में प्रतिस्पर्धा और गुणवत्ता दोनों में सुधार होगा और राज्य में आने वाले पर्यटकों को अधिक सुविधाजनक ठहरने के विकल्प मिलेंगे।
योजना के तहत अलग-अलग क्षेत्रों के लिए विशेष प्रावधान किए गए हैं। शहरी क्षेत्रों में तीन प्रतिशत, ग्रामीण क्षेत्रों में चार प्रतिशत और जनजातीय क्षेत्रों में पांच प्रतिशत ब्याज अनुदान दिया जाएगा। इससे होम स्टे मालिकों को आर्थिक राहत मिलेगी और वे अपने ठहराव केंद्रों को आधुनिक सुविधाओं से लैस कर सकेंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि इन निर्णयों से खासकर युवाओं और ग्रामीण इलाकों में रहने वाले लोगों के लिए नई संभावनाएं खुलेंगी। उन्होंने बताया कि होम स्टे योजना न केवल रोजगार सृजन में सहायक होगी बल्कि स्थानीय संस्कृति और परंपराओं को भी प्रोत्साहन देगी।
पर्यटन और रोजगार को मिलेगी नई उड़ान
पर्यटन ढांचे को मजबूत करने के साथ ही मंत्रिमंडल ने साहसिक पर्यटन सुरक्षा को लेकर भी अहम फैसला लिया है। पैराग्लाइडिंग जैसी गतिविधियों को सुरक्षित बनाने के लिए अब पर्यटन विभाग के साथ पंजीकृत सभी टेंडम पायलटों के लिए 31 अगस्त 2026 तक सिमुलेशन पैराग्लाइडिंग सुरक्षा पाठ्यक्रम पूरा करना अनिवार्य कर दिया गया है। सरकार का कहना है कि इस कदम से न केवल पर्यटकों की सुरक्षा सुनिश्चित होगी, बल्कि हिमाचल की छवि एक सुरक्षित और जिम्मेदार पर्यटन गंतव्य के रूप में और मजबूत होगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि ये फैसले राज्य के पर्यटन उद्योग में नई जान फूंकेंगे। होम स्टे योजनाओं से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को बढ़ावा मिलेगा और स्थानीय लोगों की आय में वृद्धि होगी। वहीं, पैराग्लाइडिंग सुरक्षा नियमों से साहसिक पर्यटन को पेशेवर और सुरक्षित बनाया जा सकेगा। सरकार को उम्मीद है कि इससे हिमाचल प्रदेश की पहचान देश-विदेश के पर्यटकों के बीच और ज्यादा मजबूत होगी।





