जल जीवन मिशन के तहत केंद्र सरकार से मिलने वाली राशि समय पर नहीं पहुंचने से प्रदेश में सभी काम ठप पड़ गए हैं। बार-बार मांग करने के बावजूद धनराशि नहीं मिलने के कारण न केवल योजनाओं का कार्यान्वयन रुक गया है, बल्कि आम जनता को मिलने वाली मूलभूत सुविधाएं भी अधर में लटक गई हैं। सबसे ज्यादा प्रभावित वे कर्मचारी हैं, जिन्हें आउटसोर्स आधार पर मिशन के लिए नियुक्त किया गया था। चार महीने से ज्यादा समय से इन्हें वेतन नहीं मिला है, जिससे इनकी आर्थिक स्थिति बिगड़ रही है और अब ये सड़क पर उतरने की तैयारी कर रहे हैं। वहीं जल जीवन मिशन के तहत काम करने वाले ठेकेदार भी भुगतान न होने से परेशान होकर कार्य छोड़ चुके हैं।
जल जीवन मिशन की रफ्तार थमी
प्रदेश सरकार का कहना है कि उसने केंद्र द्वारा निर्धारित सभी औपचारिकताएं पूरी कर ली हैं। हाल ही में ग्रामीण क्षेत्रों की पेयजल योजनाओं का जिम्मा पंचायतों को सौंपा गया है, जो मिशन की एक बड़ी शर्त थी। इसके बावजूद केंद्र सरकार न तो जल जीवन मिशन के दूसरे चरण की घोषणा कर रही है और न ही बकाया राशि का भुगतान कर रही है। इस वजह से करोड़ों रुपये अटके हुए हैं और राज्य सरकार के पास इतना संसाधन नहीं है कि वह अपने स्तर पर भुगतान कर सके।
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स्थिति यह है कि जल जीवन मिशन के कई कार्य, जो आखिरी चरण में थे, वे भी अधूरे रह गए हैं। ग्रामीण इलाकों में लोग पूछ रहे हैं कि जिन योजनाओं का उन्हें लाभ मिलना था, वे क्यों अटकी हुई हैं। विधानसभा में भी इस मुद्दे पर सवाल उठे, लेकिन सरकार की ओर से यही जवाब दिया गया कि जब तक केंद्र से बकाया राशि नहीं मिलेगी, तब तक काम आगे नहीं बढ़ सकता। फिलहाल 400 से अधिक डाटा एंट्री ऑपरेटर और अन्य आउटसोर्स कर्मियों को मेहनताना न मिलने से वे हताश हैं और आंदोलन की तैयारी कर रहे हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर समय रहते केंद्र सरकार ने राशि जारी नहीं की, तो जल जीवन मिशन की गति और धीमी हो जाएगी और ग्रामीण इलाकों में पीने के पानी से जुड़ी गंभीर समस्या खड़ी हो सकती है। प्रदेश सरकार को अब उम्मीद है कि जल्द ही केंद्र इस दिशा में सकारात्मक कदम उठाएगा और मिशन को नया जीवन देगा।