केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण तथा रसायन एवं उर्वरक मंत्री जेपी नड्डा ने शिमला में केंद्र सरकार की उपलब्धियों और हिमाचल प्रदेश में चल रही विकास परियोजनाओं को लेकर प्रेस वार्ता की। दरअसल इस दौरान उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार ने पिछले 12 वर्षों में हिमाचल प्रदेश के विकास के लिए हर संभव सहयोग दिया है। उन्होंने दावा किया कि विभिन्न क्षेत्रों में दी गई आर्थिक सहायता से राज्य में कई महत्वपूर्ण परियोजनाएं आगे बढ़ी हैं।
दरअसल जेपी नड्डा ने कहा कि वित्त वर्ष 2024-25 में हिमाचल प्रदेश को विशेष सहायता योजना के तहत 2,381 करोड़ रुपये, एनडीआरएफ के माध्यम से 2,006 करोड़ रुपये और बाह्य सहायता प्राप्त परियोजनाओं के लिए 2,150 करोड़ रुपये की अतिरिक्त सहायता दी गई। उन्होंने बताया कि राज्य में 40 हजार करोड़ रुपये से अधिक की राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाएं प्रगति पर हैं। इसके अलावा रेलवे क्षेत्र के लिए 2,911 करोड़ रुपये का आवंटन किया गया है, जिसे उन्होंने अब तक का रिकॉर्ड निवेश बताया है।
हिमाचल विकास परियोजनाओं पर नड्डा का दावा
इसके साथ ही जेपी नड्डा ने कहा है कि केंद्र सरकार की ओर से एम्स बिलासपुर, आईआईएम सिरमौर, आईआईआईटी ऊना, स्मार्ट सिटी मिशन, रेणुका जी बांध और लुहरी जलविद्युत परियोजना जैसी कई बड़ी योजनाओं को मंजूरी और सहयोग दिया गया है। उन्होंने स्वास्थ्य क्षेत्र का जिक्र करते हुए कहा कि मेडिकल कॉलेजों, पीजीआई सैटेलाइट सेंटर और आईजीएमसी शिमला के लिए भी पर्याप्त वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई गई है। दरअसल उन्होंने आरोप लगाया कि कई योजनाओं के क्रियान्वयन की गति अपेक्षित स्तर तक नहीं पहुंच सकी। उनके अनुसार पीएम-एबीएचआईएम योजना के तहत स्वीकृत 15 क्रिटिकल केयर ब्लॉकों में से केवल एक का निर्माण पूरा हो पाया है। इसी तरह 12 सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रयोगशालाओं में से भी सिर्फ एक प्रयोगशाला तैयार हुई है।
मेडिकल डिवाइस पार्क पर उठाए सवाल
दरअसल जेपी नड्डा ने बल्क ड्रग पार्क परियोजना का उल्लेख करते हुए कहा कि केंद्र सरकार ने अक्टूबर 2022 में इस योजना को मंजूरी दी थी। उन्होंने दावा किया कि पर्यावरणीय मंजूरी मिलने में करीब तीन वर्ष का समय लग गया, जिससे परियोजना की रफ्तार प्रभावित हुई। उनके अनुसार केंद्र ने इस परियोजना के लिए 1,000 करोड़ रुपये की सहायता स्वीकृत की थी और 225 करोड़ रुपये जारी भी किए थे, लेकिन राज्य सरकार केवल 102.13 करोड़ रुपये ही खर्च कर सकी।
उन्होंने मेडिकल डिवाइस पार्क परियोजना का भी जिक्र किया। जेपी नड्डा ने कहा कि फरवरी 2022 में स्वीकृत इस योजना से हिमाचल प्रदेश को चिकित्सा उपकरण निर्माण का बड़ा केंद्र बनाने की संभावना थी। उनके अनुसार अक्टूबर 2024 में राज्य सरकार के पीछे हटने के कारण यह परियोजना आगे नहीं बढ़ सकी और केंद्र द्वारा जारी 30 करोड़ रुपये की पहली किस्त वापस करनी पड़ी।






