हिमाचल प्रदेश के वित्तीय हितों को लेकर एक महत्वपूर्ण खबर सामने आई है। दरअसल मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने गुरुवार को नई दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में आयोजित नीति आयोग की 11वीं गवर्निंग काउंसिल की बैठक में राज्य से जुड़े कई अहम मुद्दे उठाए। इनमें हिमाचल प्रदेश के हजारों करोड़ रुपये के बकाया भुगतान और लंबे समय से लंबित राहत पैकेज का मामला प्रमुख रूप से शामिल रहा।
दरअसल बैठक के दौरान मुख्यमंत्री सुक्खू ने प्रधानमंत्री को बताया कि राजस्व घाटा अनुदान (आरडीजी) बंद होने, पिछले वर्ष आई प्राकृतिक आपदाओं से हुए भारी नुकसान, जीएसटी लागू होने के बाद राजस्व में आई कमी और पावर प्रोजेक्ट्स में मिलने वाली मुफ्त बिजली के हिस्से में कटौती के कारण राज्य को गंभीर आर्थिक नुकसान झेलना पड़ रहा है। उन्होंने इन परिस्थितियों को देखते हुए केंद्र सरकार से विशेष सहयोग देने की मांग की।
उच्च स्तरीय समिति का गठन करने का आग्रह किया
मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री से आग्रह किया कि हिमाचल प्रदेश की मौजूदा आर्थिक स्थिति का विस्तृत अध्ययन करने के लिए एक उच्च स्तरीय समिति का गठन किया जाए। उन्होंने कहा कि राजस्व घाटा अनुदान बंद होने से प्रदेश की वित्तीय स्थिति पर बड़ा असर पड़ा है। उन्होंने यह भी कहा कि केंद्र से अब तक मिले 25 हजार करोड़ रुपये प्रदेश की जरूरतों के लिए पर्याप्त नहीं हैं। इसलिए इस राशि को बढ़ाकर 50 हजार करोड़ रुपये किया जाना चाहिए, ताकि राज्य आर्थिक चुनौतियों से बाहर निकल सके।
हिमाचल को ग्रीन बोनस देने की मांग की
वहीं सीएम सुक्खू ने बैठक में यह भी बताया कि हिमाचल प्रदेश हर साल देश को लगभग 90 हजार करोड़ रुपये मूल्य की पर्यावरणीय और पारिस्थितिकीय सेवाएं प्रदान करता है। इसके बावजूद राज्य को इसके बदले कोई आर्थिक सहायता नहीं मिलती। उन्होंने केंद्र सरकार से हिमाचल को ग्रीन बोनस देने की मांग की, ताकि पर्यावरण संरक्षण में राज्य की भूमिका को उचित सम्मान और प्रोत्साहन मिल सके।
बकाया भुगतान का मुद्दा भी उठाया
दरअसल बैठक में मुख्यमंत्री ने सतलुज-ब्यास प्रबंधन बोर्ड (बीबीएमबी) से हिमाचल प्रदेश के करीब 4 हजार करोड़ रुपये के बकाया भुगतान का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के स्पष्ट आदेशों के बावजूद यह राशि अभी तक राज्य को नहीं मिली है। प्रदेश सरकार इस मामले को कई बार केंद्र सरकार के सामने रख चुकी है और अब एक बार फिर इसके जल्द भुगतान की मांग की गई है।
मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा पिछले वर्ष हिमाचल दौरे के दौरान घोषित 1500 करोड़ रुपये के विशेष आपदा राहत पैकेज का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि घोषणा के काफी समय बाद भी यह राशि प्रदेश को नहीं मिली है। इससे आपदा प्रभावित क्षेत्रों में राहत और पुनर्वास कार्य प्रभावित हो रहे हैं।
सुक्खू ने यह भी बताया कि जीएसटी लागू होने के बाद पिछले आठ वर्षों में हिमाचल प्रदेश को लगभग 25 हजार करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है। इसके अलावा उन्होंने जलविद्युत परियोजनाओं में राज्य के अधिकारों की सुरक्षा, कांगड़ा के गग्गल एयरपोर्ट के विस्तार, हरित ऊर्जा परियोजनाओं को बढ़ावा देने और चंद्रभागा-रावी-ब्यास लिंक परियोजना में हिमाचल के हितों की रक्षा जैसे महत्वपूर्ण विषय भी मजबूती से उठाए।






