हिमाचल प्रदेश में मणिमहेश यात्रा का आगाज जन्माष्टमी के मौके पर छोटे शाही स्नान से हुआ। शुक्रवार सुबह 11:50 बजे से शनिवार रात 9:35 बजे तक रहे शुभ मुहूर्त में करीब 20 हजार श्रद्धालुओं ने डल झील में आस्था की डुबकी लगाई। यात्रा आधिकारिक रूप से शुरू हो गई है और इसका समापन राधाष्टमी के अवसर पर होने वाले बड़े शाही स्नान से होगा। यात्रा शुरू होते ही श्रद्धालुओं की संख्या में तेजी से बढ़ोतरी होने लगी है।
20 हजार श्रद्धालुओं ने लगाया आस्था का डुबकी
डल झील में स्नान के लिए सबसे ज्यादा श्रद्धालु भद्रवाह और डोडा से पहुंचे थे। कई श्रद्धालु वीरवार रात को ही अपनी छड़ियों के साथ झील तक पहुंच गए थे और सुबह शुभ मुहूर्त पर भगवान भोलेनाथ का नाम लेकर स्नान किया। पूरी रात भक्तों ने जयकारों से माहौल को शिवमय बनाए रखा। कहा जाता है कि चौथे पहर में कैलाश पर्वत पर चमकने वाली मणि के दर्शन से भक्तों का उत्साह और भक्ति और गहराई से जागृत होती है। शुक्रवार की रात को भी श्रद्धालुओं ने इस अद्भुत दृश्य का दर्शन किया और पूरा कैलाश भगवान शंकर के जयकारों से गूंज उठा।
प्रशासन की ओर से श्रद्धालुओं के लिए पंजीकरण की अनिवार्यता तय की गई है। यात्रा में शामिल होने के लिए भक्तों को पहले पंजीकरण कराना होगा। इसके लिए जगह-जगह व्यवस्थाएं की गई हैं। इस बार पहली बार गुईनाला में भी अलग से पंजीकरण की सुविधा दी गई है। अधिकारियों का कहना है कि इससे श्रद्धालुओं की भीड़ को बेहतर तरीके से नियंत्रित किया जा सकेगा और यात्रा में व्यवस्था बनाए रखना आसान होगा।
अतिरिक्त जिला दंडाधिकारी कुलबीर सिंह राणा ने बताया कि छोटे शाही स्नान पर 20 हजार श्रद्धालुओं ने स्नान किया है और अनुमान है कि राधाष्टमी के दिन होने वाले बड़े शाही स्नान में श्रद्धालुओं की संख्या लाखों तक पहुंच सकती है। प्रशासन ने सुरक्षा और सुविधा के लिए पूरी तैयारियां की हैं। चिकित्सा, परिवहन और ठहरने की व्यवस्थाओं पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है ताकि किसी भी श्रद्धालु को यात्रा के दौरान असुविधा न हो।





