राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले को लेकर राजनीतिक बयानबाजी लगातार तेज होती जा रही है। दरअसल हिमाचल प्रदेश के लोक निर्माण मंत्री विक्रमादित्य सिंह ने इस मुद्दे पर भारतीय जनता पार्टी पर सीधा हमला बोलते हुए कहा कि अगर प्रभु राम के नाम पर जुटाए गए चढ़ावे में गड़बड़ी के आरोप सामने आए हैं तो पूरे मामले की निष्पक्ष जांच जरूरी है। उन्होंने कहा कि इस तरह के आरोप देशभर के करोड़ों श्रद्धालुओं की भावनाओं से जुड़े हैं, इसलिए सच्चाई सामने आनी चाहिए।
दरअसल शिमला में आयोजित प्रेस वार्ता के दौरान विक्रमादित्य सिंह ने कहा कि जिन लोगों ने भगवान राम के नाम पर भरोसा करने वालों की भावनाओं को ठेस पहुंचाई है, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि मामले की जांच किसी स्वतंत्र व्यवस्था के तहत होनी चाहिए ताकि किसी भी तरह का संदेह न रहे। उन्होंने यह भी कहा कि जांच एजेंसियों की निष्पक्षता पर सवाल उठ रहे हैं, इसलिए सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में जांच कराना बेहतर विकल्प होगा।
कांग्रेस ने उठाई निष्पक्ष जांच की मांग
वहीं अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के राष्ट्रीय प्रवक्ता और ठियोग से विधायक कुलदीप राठौर ने भी इस मामले में विस्तृत जांच की मांग की है। दरअसल उन्होंने कहा कि राम मंदिर केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि करोड़ों लोगों की आस्था का केंद्र है। ऐसे में यदि चढ़ावे में कथित गड़बड़ी के आरोप लगे हैं तो पूरे मामले की पारदर्शी जांच होना जरूरी है। उन्होंने कहा कि केवल शुरुआती कार्रवाई से लोगों का भरोसा वापस नहीं आएगा, बल्कि जांच की पूरी प्रक्रिया भी निष्पक्ष दिखाई देनी चाहिए।
एसआईटी पर भी सवाल उठाए
दरअसल कुलदीप राठौर ने उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा गठित एसआईटी पर भी सवाल उठाए। उनका कहना था कि जब जांच उसी प्रशासनिक व्यवस्था के अधिकारियों के हाथ में होगी, जिस पर सवाल उठ रहे हैं, तब निष्पक्षता को लेकर स्वाभाविक रूप से सवाल खड़े होंगे। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के सिटिंग जज की निगरानी में जांच कराने की मांग दोहराई। साथ ही उन्होंने कहा कि यदि जांच में कोई भी व्यक्ति दोषी पाया जाता है तो उसके खिलाफ बिना किसी भेदभाव के कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए।
ट्रस्ट को लेकर भी उठाए सवाल
इसके साथ ही कांग्रेस नेताओं ने प्रेस वार्ता के दौरान मंदिर परिसर की सुरक्षा व्यवस्था का भी जिक्र किया। उनका कहना था कि राम मंदिर जैसे अत्यधिक सुरक्षित परिसर में बड़ी संख्या में सुरक्षाकर्मी तैनात रहते हैं और निगरानी के लिए सीसीटीवी कैमरों का व्यापक नेटवर्क मौजूद है। ऐसे में यदि चढ़ावे से जुड़ी किसी तरह की कथित अनियमितता हुई है तो यह जानना जरूरी है कि सुरक्षा व्यवस्था में चूक कहां हुई और जिम्मेदारी किसकी बनती है। कुलदीप राठौर ने यह भी आरोप लगाया कि मंदिर निर्माण से जुड़े ट्रस्ट को सूचना के अधिकार (RTI) के दायरे से बाहर रखा गया है, जिससे पारदर्शिता को लेकर सवाल उठ रहे हैं।






