प्रतिबन्ध के बावजूद बांद्राभान संगम तट पर स्नान करने पहुंचे लोग, देखती रही पुलिस

प्रतिबन्ध के बावजूद बांद्राभान संगम तट पर स्नान करने पहुंचे लोग, देखती रही पुलिस

होशंगाबाद, राहुल अग्रवाल| एक माह पहले जिला प्रशासन द्वारा बैठक कर संगम तट पर लगने वाले बांद्राभान मेले (Bandrabhan Mela) का आयोजन कोरोना संक्रमण (Coronavirus) को देखते हुए स्थगित कर दिया था। साथ ही संगम स्नान पर भी प्रतिबंध लगा हुआ है। बाबजूद इसके सुबह से ही लोग बड़ी संख्या में स्नान करने पहुँच रहे है। साथ ही कई जगह छोटे भंडारे भी चल रहे। ऐसा नही की प्रशासन (Administration) को इसकी खबर नही है यर सब पुलिस और प्रशासन की आँखों के सामने ही हो रहा पुलिस भी तमाशबीन बनी रही|

प्रशासन कोविड-19 कोरोनावायरस के संक्रमण से बचाने के लिए कितने कारगर उपाय कर रही है उसका उदाहरण आज बांद्रा भान स्थित तवा संगम पर देखने को मिला| प्रतिबंध के बावजूद आज सुबह से ही लोग स्नान करते हुए देखे गए| जबकि वहां पर कुछ पुलिसकर्मी भी दिखाई दे रहे हैं| आखिर प्रशासन की कथनी और करनी में इतना अंतर क्यों ? कोरोना संक्रमण से बचने के लिए प्रशासन 1 माह पूर्व से ही बांद्राभान मेले के स्थगन के आदेश दे चुका है लेकिन अगर देखा जाए तो वह सिर्फ कागजों में होता है असली जमीनी हकीकत कुछ और ही होती है | जबकि पूरे प्रदेश में संक्रमण धीरे-धीरे अपने पैर पसारने लगा है| बांद्रा भान में नहाने आए हुए लोगों को देखते हुए नहीं लगता कि प्रशासन कोविड-19 संक्रमण को लेकर चिंतित है।

Gaurav Sharma
लेखक के बारे में
Gaurav Sharma

निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
Follow Us :GoogleNews