गर्ल्स कॉलेज में ‘मुन्नी बदनाम हुई’ गाने पर थिरके अतिथि विद्वान, मचाया हुडदंग, वीडियो वायरल

गर्ल्स कॉलेज में ‘मुन्नी बदनाम हुई’ गाने पर थिरके अतिथि विद्वान, मचाया हुडदंग, वीडियो वायरल

होशंगाबाद।

बीते दिनों सोशल मीडिया पर बड़वानी के सरकारी स्कूल के दो टीचरों (महिला-पुरुष) का स्टेज पर डांस करते हुए वीडियो वायरल हुआ था। जिसको लेकर खूब हंगामा हुआ था और कई तरह के सवाल भी उठे थे।इसके बाद स्कूल प्रशासन ने दोनों टीचरों को नोटिस जारी किया था। अब हाेशंगाबाद जिले से एक वीडियो वायरल हुआ है ,जिसमें मुन्नी बदनाम हुई..जैसे फूहड़ गाने पर अतिथि विद्वान और काॅलेज स्टाफ का नाचते हुए नजर आ रहे है।

वीडियो जिले के सबसे बड़े और अग्रणी गर्ल्स काॅलेज का है। यहां 18 जनवरी को राष्ट्रीय शाेध संगाेष्ठी का आयोजन किया गया था।इसमें शोधार्थी, छात्र-छात्राएं, अतिथि विद्वान और कॉलेज के स्टॉफ शामिल हुए । बच्चों का मनोरंजन करने के लिए मुंबई से जूनियर कलाकरों को भी बुलाया गया था।इसमें चुलबुल पांडे बने मुंबई के कलाकार भावेश सोलंकी ने संगोष्ठी संयोजक डॉ. ज्योति जुनगरे के साथ एक-एक कर मंच पर नृत्य करने आमंत्रित किया।

इस दौरान अतिथि विद्वानों और कॉलेजकर्मियों ने मंच पर मुन्नी बदनाम हुई..जैसे फूहड़ गाने पर नाचना शुरु कर दिया। देखते ही देखते मंच पर हुड़दंग शुरू हो गया, सीटियां बजने लगी, शोर होने लगा। इसके बाद प्राचार्य ने तुरंत म्यूजिक बंद करवाने को कहा।इस दौरान वहां मौजूद लोगों ने वीडियो बनाया जो अब तेजी से सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।वही कार्यक्रम के बाद प्रबंधन पर कई तरह के सवाल उठने लगे है। इस मामले में भोपाल होशंगाबाद संभाग के उच्च शिक्षा के एडी डॉ. एमएस रघुवंशी द्वारा शिकायत होने पर विभाग प्राचार्य और प्राध्यापकों पर कार्रवाई की बात कर रहे है।

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पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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