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वनों को नष्ट कर रहे अफसरों पर विभाग मेहरबान, एमपी के पर्यावरण प्रेमी ने PM Modi को पत्र लिखकर की एक्शन लेने की मांग

Written by:Atul Saxena
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प्रधानमंत्री से अनुरोध किया कि वनों की सुरक्षा के लिए तैनात वन अधिकारियों को यदि बर्खास्त कर दंडित न किया गया तो अन्य वन अधिकारियों को न कोई नसीहत ही मिल पाएगी और वे भी वन सुरक्षा को महत्व ही नहीं देंगे
वनों को नष्ट कर रहे अफसरों पर विभाग मेहरबान, एमपी के पर्यावरण प्रेमी ने PM Modi को पत्र लिखकर की एक्शन लेने की मांग

mp forest cutting

मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव वृक्ष लगाने और जंगल बचाने की अपील करते हैं इससे उलट उनके ही विभाग के अफसर किस तरह उनकी भावनाओं और जंगलों को नुकसान पहुंचा रहे हैं इसका उदाहरण नर्मदापुरम से सामने आया है, यहाँ जंगलों को नष्ट किया जा रहा है और विभाग इसके लिए जिम्मेदार अफसरों पर ही मेहरबानी दिखा रहे हैं उनका प्रमोशन कर रहे हैं, एक पर्यावरण प्रेमी ने इस मामले में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को पत्र लिखकर एक्शन लेने की मांग की है।

नर्मदापुरम के पर्यावरण प्रेमी मधुकर चतुर्वेदी ने मध्य प्रदेश में वृक्षों की अवैध कटाई और वृक्षों के विनाश पर चिंता जताई है उन्होंने आरोप लगाये हैं कि कई बार वन विभाग के स्थानीय अधिकारियों से कई बार इस मामले की शिकायत की गई लेकिन कोई एक्शन नहीं लिया गया, लेकिन जब वरिष्ठ अधिकारियों से शिकायत पर जाँच की गई तो दोषी अधिकारियों को दंड देने की जगह विभाग ने  उन्हें पदोन्नत कर दिया।

प्रधानमंत्री को लिखा शिकायती पत्र 

मधुकर चतुर्वेदी ने अब इस मामले की शिकायत प्रधानमंत्री मोदी को पत्र लिखकर की है, उन्होंने पत्र में लिखा- “मध्यप्रदेश के वन मंडल नर्मदापुरम (सामान्य) में माह नवंबर 2024 में बहुमूल्य सागौन वृक्षों की RF112 छिपीखापा बीट में हुई करोड़ों रुपए के वृक्षों के विनाश की जानकारी स्थानीय CCF/DFO/SDO अधिकारियों द्वारा छुपाई जाने पर पर्यावरण प्रेमी सदस्यों की शिकायत पर वन विभाग के प्रधान मुख्य वन संरक्षक (संरक्षण) द्वारा जांच कराई गई और वन विनाश को स्वीकार करते हुए शासन को नवंबर 2024 में रिपोर्ट भेजी गई । किंतु राज्य सरकार के मंत्रालय में विराजित कर्णधारों ने वन सुरक्षा में निष्क्रिय किसी भी अधिकारी को न निलंबित किया , न दंडित ही किया , बल्कि वन विनाश को छुपाने वाले SDO मानसिंह मरावी को पदोन्नत कर DFO का पद दे दिया गया है, निवेदन है कि वनों की सुरक्षा के लिए तैनात वन अधिकारियों को यदि बर्खास्त कर दंडित न किया गया तो अन्य वन अधिकारियों को न कोई नसीहत ही मिल पाएगी और वे भी वन सुरक्षा को महत्व ही नहीं देंगे ।1256 वृक्षों की रक्षा न करने वाले मदमस्त अधिकारियों को अब तक दंडित न किया जाना विभागीय वरिष्ठ अधिकारियों की कर्मठता एवं निष्ठा पर प्रश्न चिन्ह लगा रहा है।”

वरिष्ठ अधिकारियों से कर्मचारियों के शोषण की शिकायत 

एमपी ब्रेकिंग न्यूज़ को जानकारी देते हुए मधुकर चतुर्वेदी ने बताया कि वे कई बार इस मामले की शिकायत कर चुके हैं,  प्रधान मुख्य वन संरक्षक (प्रशासन – 2) को लिखे शिकायती पत्र में बताया कि “नर्मदापुरम वन विभाग में मुख्य वन संरक्षक अशोक कुमार और DFO नर्मदापुरम मयंक गुर्जर वर्ष 2024 से पदस्थ है , जिनके द्वारा कर्मचारियों का सुधार के नाम पर मानसिक और आर्थिक शोषण किया जा रहा है , जो कतई न्यायोचित नहीं है।

छिपीखापा बीट में हो रही जंगल कटाई पर चिंता 

इटारसी परिक्षेत्र के छिपीखापा बीट के कक्ष क्रमांक RF112 में सागौन के 1300 वृक्षों की अवैध कटाई की जांच वन विभाग की संरक्षण शाखा राज्य स्तरीय उड़नदस्ता दल द्वारा माह सितंबर 2025 में की गई , जिसमें 2 करोड़ 13 लाख रुपए की हानि आंकलित की गई , यह हानि DFO नर्मदापुरम मयंक गुर्जर द्वारा कर्मचारियों की पदस्थी के अविवेकपूर्ण निर्णयों से कारीत हुई है , जिसमें अति संवेदनशील छिपीखापा बीट के वनपाल राजेंद्र नागवंशी के मार्च 2024 में लोकायुक्त प्रकरण के कारण हरदा वन मंडल में तबादला तो कर दिया , किंतु उनके स्थान पर किसी पूर्ण कालिक अधिकारी की पोस्टिंग नहीं की गई , जिसके फलस्वरूप पांडरी उप परिक्षेत्र की अति संवेदनशील बीट छिपीखापा सघन सुरक्षा से महरूम रह गया । जिसकी प्रभारी रेंजर और प्रभारी डिप्टी रेंजर द्वारा पत्र लिखकर पूर्णकालिक परिक्षेत्र सहायक की मांग कई बार की जाती रही , किंतु पोस्टिंग के शिष्टाचार के अनुरूप इस अवैध कटाई के अति संवेदनशील होने से उचित इच्छुक कर्मचारी समक्ष न आने से अनुभव की कमी से DFO नर्मदापुरम मयंक गुर्जर वन सुरक्षा का दायित्व निभाने में लापरवाही कर बैठे , जिसका खामियाजा पर्यावरण एवं वन विभाग को भुगताना पड़ रहा है ।

सागौन के पेड़ों की अवैध कटाई की शिकायत  

छिपीखापा बीट के कक्ष क्रमांक RF112 में सागौन वृक्षों की अवैध कटाई की सूचना मुख्य वन संरक्षक नर्मदापुरम द्वारा दिए जाने पर भी सचेत न हुए तथा माह नवंबर 2024 में वृत्त स्तरीय उड़न दस्ता दल द्वारा 356 सागौन वृक्षों की अवैध कटाई से 1 करोड़ 50 लाख 92 हजार 230 रुपए की हानि जो POR प्रकरण क्रमांक 13748/79 से वन मंडल में दिनांक 29/11/2024 को जमा कर दी गई थी को तहस-नहस करने में लग गए और कुल हानि 2 लाख 6 हजार 610 रुपए मूल्य की रिपोर्ट अपने पत्र क्रमांक 1314 , दिनांक 28/01/2025 से मुख्य वन संरक्षक नर्मदापुरम को भेजी । किंतु कर्मचारियों और उनके परिवार के प्रति निष्ठुरता का प्रमाण DFO नर्मदापुरम मयंक गुर्जर द्वारा वनपाल अजय श्रीवास्तव को 72 लाख रुपए , वनरक्षक राजेश सरियाम को 60 लाख 17 हजार 660 रुपए , वनरक्षक अजय गौर को 65 लाख 42 हजार 682 रुपए और वनरक्षक राजेश यादव को 1 लाख 24 हजार 239 रुपए , कुल 1 करोड़ 99 लाख रुपए की वसूली हेतु जारी आरोप पत्र द्वारा कर्मचारियों और उनके परिवारों को वसूली की चिंता ने अशांत कर उथल-पुथल मचा दिया है , जो एक क्रूर और अत्याचारी अधिकारी होने का संकेत है , कि जब स्वयं हानि 2 लाख 6 हजार 610 रुपए बता रहे है तो छोटे कर्मचारियों से हानि की वसूली करोड़ों में क्यों और क्या उद्देश्य रहा होगा?

मिलीभगत से शासन को आर्थिक नुकसान 

इन्हीं कर्मचारियों से स्वयं के निवास हेतु 3 AC 1 लाख 22 हजार रुपए के शिवा इलेक्ट्रॉनिक्स नर्मदापुरम से कर्मचारी से भुगतान करवाकर व्यय शाखा के लेखापाल से भवन मरम्मत के झूठे प्रमाणक वन मंडल के लेखे में समायोजित किए गए है , बदले में उसी लेखापाल को मुख्य लिपिक का प्रभारी होते हुए बजट से भरपूर CAMPA , FDA शाखाओं आदि का स्वतंत्र प्रभारी बना दिया , जबकि कार्यालय में अन्य लेखापाल करण सिंह नागवंशी बाबू एवं प्रेम नारायण लुनिया बाबू भी मौजूद है । जो केवल अन्य अर्थ विहीन कार्य करने पर मजबूर है । लिपिक कर्मचारियों ने DFO नर्मदापुरम मयंक गुर्जर की कार्यप्रणाली PICK and USE की शिकायत मुख्य वन संरक्षक नर्मदापुरम को की थी , जो दाखिल दफ्तर कर दी गई है । वनरक्षकों से वन मंडल कार्यालय में कार्यालयीन कार्य न लिए जाने के शासन एवं जांच समिति के आदेशों की अवेहलना कर वनरक्षकों (मंजू माछिया , दुर्गेश पाल , लोकेश दीक्षित , वंदना शर्मा , विजय मालवीय , अजय पाल) से कार्यालयीन कार्य करवाने हेतु वन मंडल कार्यालय में पदस्थ किया गया है ।

DFO नर्मदापुरम मयंक गुर्जर द्वारा मनमाने तरीके से GAD के निर्देशों के विरुद्ध कर्मचारियों को लंबे समय तक निलंबित किया जाकर , लघु एवं दीर्घ शास्ती दी जाकर , NO WORK NO PAY के आदेश दिए गए है , जो major punishment ही होता है । इनकी कर्मचारी विरुद्ध नीति के कारण नर्मदापुरम वन मंडल के डेढ़ साल के सेवा काल में अनेकों कर्मचारियों को इनके कोप भाजन (निलंबित) का शिकार होना पड़ा है। आप से अनुरोध है कि , कर्मचारियों को जारी आरोप पत्र निरस्त किए जाए और DFO नर्मदापुरम मयंक गुर्जर को परिपक्व होने तक सचिवालय या अन्य शाखाओं में पदस्थी अपेक्षित है और DFO नर्मदापुरम मयंक गुर्जर के विशेष चहते लेखापाल सुनील बाठोरे बाबू को हरदा या अन्य वन मंडल में स्थानांतरित किया जाए।”

बहरहाल पर्यावरण प्रेमियों ने उम्मीद जताई है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दखल के बाद निश्चित रूप से मध्य प्रदेश के जंगलों को बचाया जा सकेगा और दोषी अधिकारियों को दंड मिलने से दूसरे किसी अधिकारी अथवा कर्मचारी की हिम्मत नहीं होगी कि वो जंगल को नुकसान पहुंचा पाए, मधुकर चतुर्वेदी का कहना है कि जब शासन ने करोड़ों रु के वृक्षों की अवैध कटाई मान ली तो नियमानुसार वहां के अधिकारियों को हटा कर ही जांच होनी थी।