
छठ महापर्व के लिए लोग उतने ही उत्साहित होते हैं जितने ही दिवाली के लिए। छठ पूजा को साल भर का बड़ा त्योहार माना जाता है। यह केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं है बल्कि कठोर तपस्या और अटूट विश्वास का प्रतीक भी है। चार दिनों तक चलने वाले इस त्योहार पर लाखो व्रतधारी महिलाएँ और पुरुष अपनी सबसे गहरी आशाओं को लेकर छठी मईया और सूर्य देव के समक्ष नतमस्तक होते हैं। इन सभी कामनाओं में से सबसे प्रमुख कामना जो होती है वह होती है संतान प्राप्ति की कामना। वे दंपती जो वर्षों से गोद भरने की आस लगाए बैठे हैं उनके लिए छठ का व्रत आशा की अंतिम किरण बनकर आता है।
सूर्य को स्वास्थ्य, तेज और सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक माना गया है। छठ पूजा एकमात्र ऐसा पर्व है जहाँ घूमते और उगते सूरज दोनों को अर्घ्य दिया जाता है। यह सूर्य की दोनों अवस्थाओं से ऊर्जा ग्रहण करने का वैज्ञानिक महत्व रखता है। ऐसा माना जाता है कि अगर आप सच्चे मनन और नियमों के साथ छठ पूजा में कुछ विशेष उपायों को शामिल करते हैं, तो मनोकामना जल्द से जल्द पूरी होती है। आज हम इस लेख में उन उपायों पर प्रकाश डालेंगे।
छठ पूजा के दिन ज़रूर करें ये काम (Chhath Puja)
सतान प्राप्ति और सुख समृद्धि के लिए उपाय
सूर्यदेव को अर्घ्य देते समय जल के लोटे में लाल चंदन, गुड़हल का फूल और थोड़ा सा दूध अवश्य मिलाएं। व्रती महिला और उनके पति को नारियल और गन्ना को हाथ में लेकर घाट पर खड़े होना चाहिए। जब महिला जल में खड़ी होकर सूर्य को अर्घ्य दे रही हो, तब उनके पति को पीछे खड़ा होकर अपनी दोनों हथेलियों में नारियल और गन्ना पकड़कर पत्नी के साथ ही सूर्य मंत्रों का जाप करना चाहिए।
मनोकामना पूरी करने के लिए
शाम के अर्घ्य के बाद घाट पर या फिर अपने पूजा स्थल पर 11, 21 या 51 दीये जलाएं। सभी दीयों में गाय का घी और पीली सरसों का तेल मिलाकर डालें। अपनी मनोकामना को मन में रखते हुए एक दिये को सबसे बड़ा जलाएं और उसे उत्तर पूर्व दिशा में रखें। यह दिशा शक्तियों और बृहस्पति ग्रह की होती है, जो सौभाग्य और शुभ कार्यों का कारक है।
धन और समृद्धि के लिए
सूर्यदेव को अर्घ्य देने के लिए कभी भी प्लास्टिक या लोहे का पात्र का प्रयोग नहीं करना चाहिए। धन लाभ और समृद्धि के लिए ताँबे या पीतल के कलेश का ही उपयोग करें। अर्घ्य के जल में साबूत हल्दी की गाँठ, अक्षत और थोड़ा सा गुड़ ज़रूर मिलाएँ। ऐसा माना जाता है कि हल्दी बृहस्पति का, गुड मंगल का, और ताम्बा सूर्य का प्रतीक है। इन तीनों के संयोग से ही राज्य योग जैसा प्रभाग बनता है।
शीघ्र विवाह की मनोकामना के लिए
यदि विवाह में देरी हो रही है तो छठे के दौरान किया गया ये उपाय विवाह के योग को मज़बूत कर सकता है। अर्घ्य के बाद, व्रत रखने वाली महिला या पुरुष को पीले वस्त्र दान करने चाहिए। घाट पर या जल के पास, एक छोटी सी कलेश में शुद्ध जल भरकर, उसमें हल्दी घोलकर सूर्यदेव को अर्पित करें। इस बचे हुए जल्द से अपने माथे पर तिलक लगाएं। पीला रंग और हल्दी ज्योतिष में विवाह और सौभाग्य के कारक बृहस्पति गृह से जुड़े हैं। यह उपाय विवाह में आ रही बाधाओं को दूर करता है।

