देवी अहिल्या विश्वविद्यालय (DAVV) झाबुआ में अपना मेडिकल कॉलेज स्थापित करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। विश्वविद्यालय को इसके लिए आवश्यक भूमि आवंटित हो चुकी है, और अब प्रारंभिक कक्षाओं के संचालन हेतु एक अस्थायी व्यवस्था पर विचार किया जा रहा है। कुलगुरु डॉ. राकेश सिंघई के नेतृत्व में यह महत्वाकांक्षी परियोजना 350 से 400 करोड़ रुपए की अनुमानित लागत के साथ साकार होगी। विश्वविद्यालय प्रबंधन को आशा है कि इस माह के अंत तक इस संबंध में महत्वपूर्ण निर्णय आ सकता है।
दरअसल विश्वविद्यालय की कार्यपरिषद ने झाबुआ में मेडिकल कॉलेज खोलने का ऐतिहासिक फैसला लिया था। इस निर्णय के तहत, मध्यप्रदेश शासन ने उच्च शिक्षा विभाग के माध्यम से देवी अहिल्या विश्वविद्यालय को मेडिकल कॉलेज के निर्माण के लिए 70 एकड़ भूमि आवंटित कर दी है। यह आवंटन विश्वविद्यालय को अपने स्वयं के चिकित्सा शिक्षा संस्थान की स्थापना की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
झाबुआ जिला अस्पताल को भी विश्वविद्यालय को सौंपने पर विचार किया जा रहा
परियोजना के एक अहम पहलू के रूप में, झाबुआ जिला अस्पताल को भी विश्वविद्यालय को सौंपने पर विचार किया जा रहा है। मध्यप्रदेश शासन इस संबंध में निर्णय ले रहा है कि जिला अस्पताल को विश्वविद्यालय को सौंप दिया जाए, ताकि यह नए मेडिकल कॉलेज के लिए एक शैक्षणिक अस्पताल के रूप में कार्य कर सके। वर्तमान में, झाबुआ जिला अस्पताल में लगभग 250 बिस्तर उपलब्ध हैं। राष्ट्रीय मेडिकल काउंसिल (NMC) के मानदंडों के अनुसार, 100 सीटों वाले मेडिकल कॉलेज के लिए 300 बिस्तरों वाले अस्पताल की आवश्यकता होती है। विश्वविद्यालय का मानना है कि जिला अस्पताल के अधिग्रहण से यह आवश्यकता पूरी हो जाएगी, जिससे छात्रों को पर्याप्त नैदानिक अनुभव मिल सकेगा।
आवेदन भी प्रस्तुत कर दिया गया
कुलगुरु प्रोफेसर राकेश सिंघई ने बताया कि विश्वविद्यालय ने एक अभिनव प्रस्ताव भी रखा है। जब तक झाबुआ में मेडिकल कॉलेज का नया परिसर तैयार नहीं हो जाता, तब तक राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (RGPV) के इंजीनियरिंग कॉलेज में मेडिकल कॉलेज चलाने की अनुमति मांगी गई है। विश्वविद्यालय ने नेशनल मेडिकल काउंसिल (NMC) में इस अस्थायी व्यवस्था के लिए आवेदन भी प्रस्तुत कर दिया है। यह कदम यह सुनिश्चित करेगा कि कॉलेज की स्थापना प्रक्रिया में कोई देरी न हो और शैक्षणिक सत्र समय पर शुरू हो सके।
350 से 400 करोड़ रुपए का निवेश आवश्यक होगा
इस परियोजना की कुल लागत का अनुमान लगाया गया है। कुलगुरु ने स्पष्ट किया कि अस्पताल के अधिग्रहण से उसकी लागत अलग होगी, क्योंकि यह शासन द्वारा सौंपा जा रहा है। हालांकि, मेडिकल कॉलेज के भवन और अन्य आवश्यक बुनियादी ढांचे के निर्माण के लिए प्रारंभिक तौर पर 350 से 400 करोड़ रुपए का निवेश आवश्यक होगा। यह राशि कॉलेज के आधुनिक कक्षाओं, प्रयोगशालाओं, पुस्तकालय और प्रशासनिक खंड के निर्माण पर खर्च की जाएगी।






