इंदौर में हर दूसरा व्यक्ति सोमेटिक डिसऑर्डर से पीड़ित, जानिये क्या हैं लक्षण

इंदौर में हर दूसरा व्यक्ति सोमेटिक डिसऑर्डर से पीड़ित, जानिये क्या हैं लक्षण

इंदौर/आकाश धोलपुरे

कोरोना वायरस से लोग इतने बीमार नहीं हैं, जितने मानसिक रूप से अपने आपको कोरोना का मरीज समझने लगे हैं। ऐसे लोग न तो अपनी नींद पूरी कर पा रहे हैं और न ही किसी को बता पा रहे हैं। मध्यप्रदेश में कोरोना हॉटस्पॉट बन चुके इंदौर में भी यही स्थिति है, अस्पतालों में और डॉक्टरों के पास आए दिन इस तरह के केस आ रहे हैं। डॉक्टरों का कहना है कि सामान्य सर्दी-जुकाम, सीने में दर्द, सिर दर्द या खांसी होने पर लोग भयभीत हो रहे हैं। वे हेल्पलाइन नंबर या डॉक्टरों को फोन कर कोरोना की जांच कराने का कह रहे हैं।

मनोचिकित्सकों का कहना है कि यह कोरोना नहीं है, बल्कि एक प्रकार का सोमेटिक डिसऑर्डर है। यह एक मानसिक बीमारी है जिसमें मरीज को खुद के किसी बीमारी से ग्रसित होने का डर सताने लगता है। ये डर किसी भी बीमारी को लेकर हो सकता है। इस समय कोरोना का कहर हर तरफ है और इसीलिये हर दूसरे व्यक्ति को ये अंदेशा हो रहा है कि कहीं उसे भी कोरोना तो नहीं हो गया। इसका कारण है कि लोग बीमारी से डरे हुए हैं और बार-बार उसी बीमारी के बारे में सोच रहे हैं। उनके लक्षणों के बारे में जान रहे हैं। इससे शरीर और मन का संबंध टूट गया है। यदि किसी व्यक्ति को किसी प्रकार का दर्द या अन्य कोई शिकायत होती है तो वे उसे कोरोना से जोड़कर देख रहे हैं।

डॉक्टरों का कहना है कि हर साल गर्मी का मौसम आने पर सर्दी-जुकाम के मरीज बढ़ते हैं। कोरोना भी ऐसे समय पर आया है। बुखार, सर्दी-जुकाम होने के कारण लोग घबराए हुए हैं। बार-बार इंटरनेट पर कोरोना के लक्षण जानना, उनके बारे में पढ़ना, सर्च करने के कारण एक दिमागी बीमारी साइबर कोन्डि्रया भी हावी हो जाती है। छोटी सी परेशानी भी कोरोना का लक्षण दिखाई देती है।

इसलिए पड़ रहा ज्यादा असर
मनोचिकित्सकों का कहना है कि लॉकडाउन के कारण लोग घरों में हैं। दिमाग खाली होने के कारण दिन-रात कोरोना के बारे में सोच रहे हैं, वायरस के बारे में चर्चा कर रहे हैं। वहीं लगातार आ रही खबरों और अफवाहों के कारण लोगों के दिमाग में इस बीमारी के लक्षण होने लगे हैं। यह कोई बड़ी बीमारी नहीं है। इससे बचने के लिए लोगों को अपना दिमाग अन्य काम में लगाना होगा।

इससे बचने के लिए क्या करें
बीमा अस्पताल में पदस्थ मनोचिकित्सक मनीष जैन ने बताया कि इससे बचने के लिए लोगों को हल्का व्यायाम करना चाहिए। ध्यान योग करें या किताबें पढ़ें। जब भी समय मिले व्यायाम करें, जिससे दिमाग दूसरी तरफ जाएगा और रोग प्रतिरोधक क्षमता भी बढ़ेगी। खबरें पढ़ें लेकिन उसका समय निश्चित करें। परिवार के साथ समय बिताएं और सुरक्षा रखें।

कोरोना न होने के बावजूद भी लोगों को इसका डर है। इसलिए उनकी रात की नींद भी पूरी नहीं हो रही है। लोगों को समझना होगा कि कोरोना के मरीज बहुत कम है। यदि खुद की और परिवार की सुरक्षा रखी जाए तो इससे बचा जा सकता है। कोरोना प्रत्येक व्यक्ति को नहीं होता। किसी भी व्यक्ति की यदि रोग प्रतिरोधक क्षमता अच्छी है तो उसे कोरोना नहीं हो सकता है। यदि हुआ भी है तो वह आसानी से निकल जाएगा और व्यक्ति को पता भी नहीं चलेगा। यदि आप लॉकडाउन हैं और किसी के संपर्क में नहीं आ रहे हैं तो आपको कोरोना नहीं हो सकता।

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निदेशक और संपादक

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