इंदौर की धार्मिक पहचान में श्री पद्मावती वेंकटेश देवस्थानम का विशेष स्थान है। जैसे ही यहां ब्रह्मोत्सव की शुरुआत होती है, पूरा वातावरण भक्ति, उल्लास और आध्यात्मिक ऊर्जा से भर जाता है। आज से शुरू हो रहा चार दिवसीय ब्रह्मोत्सव सिर्फ एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि श्रद्धालुओं के लिए आत्मिक आनंद का अवसर होता है। सुबह से ही मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ने लगती है। घंटियों की गूंज, मंत्रोच्चार और भजनों की स्वर लहरियों के बीच भक्त भगवान वेंकटेश बालाजी, श्रीदेवी और भू देवी के दर्शन के लिए कतारों में नजर आते हैं। हर वर्ष की तरह इस बार भी इंदौर में चार दिवसीय ब्रह्मोत्सव को लेकर श्रद्धालुओं में खास उत्साह देखने को मिल रहा है।
श्री पद्मावती वेंकटेश देवस्थानम ब्रह्मोत्सव की भव्य शुरुआत आज से
शहर के पश्चिमी क्षेत्र की विद्या पैलेस कॉलोनी में स्थित श्री पद्मावती वेंकटेश देवस्थानम में आज यानी 9 जनवरी से चार दिवसीय 20वें ब्रह्मोत्सव की शुरुआत हो रही है। मंदिर समिति के अनुसार श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए सभी व्यवस्थाएं पूरी कर ली गई हैं। ब्रह्मोत्सव का शुभारंभ सुबह 8:30 बजे रामानुज स्वामी के महाभिषेक के साथ होगा। यह आयोजन रामानुजाचार्य स्वामी केशवाचार्य महाराज और युवराज स्वामी श्री यतींद्रचार्य के सान्निध्य में संपन्न होगा। श्रद्धालुओं के लिए यह अवसर विशेष पुण्यदायी माना जाता है।
पहला दिन: महाभिषेक, शेषवाहन सवारी और पुष्करणी में नौका विहार
ब्रह्मोत्सव के पहले दिन का कार्यक्रम श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र रहेगा। सुबह महाभिषेक के बाद 11 बजे शेषवाहन पर रामानुज स्वामी की भव्य सवारी मंदिर परिसर की परिक्रमा करेगी। इस दौरान प्रसिद्ध भजन गायक हरिकिशन साबू के भजनों से पूरा माहौल भक्तिमय हो जाएगा। शाम होते ही मंदिर परिसर में दीपों की रोशनी सज जाती है। शाम 7 बजे भगवान वेंकटेश बालाजी श्रीदेवी और भू देवी के साथ पुष्करणी में नौका विहार करेंगे। मंत्रोच्चार और भजनों के बीच नौका विहार का यह आयोजन श्रद्धालुओं के लिए भावनात्मक और विशेष होता है, जिसे देखने के लिए बड़ी संख्या में भक्त मौजूद रहते हैं।
दूसरा दिन: पद्मावती अभिषेक और पुष्प बंगला दर्शन
10 जनवरी को ब्रह्मोत्सव का दूसरा दिन मां पद्मावती को समर्पित रहेगा। सुबह पद्मावती माता का विशेष अभिषेक किया जाएगा। इसके बाद सुबह 10 बजे हनुमंत वाहन पर भगवान वेंकटेश बालाजी की सवारी निकाली जाएगी, जिसमें श्रद्धालु जयकारों के साथ शामिल होंगे। शाम 7 बजे भगवान के दर्शन पुष्प बंगले में कराए जाएंगे। इस दौरान प्रसिद्ध भजन गायक राम हुरकट भजनों की प्रस्तुति देंगे। पुष्प बंगले की साज-सज्जा, सुगंधित फूलों और भजनों की मधुर धुनों के बीच भक्त गहरे आध्यात्मिक अनुभव से जुड़ते नजर आते हैं।
तीसरा दिन: गोदा-रंगनाथ विवाह उत्सव और भव्य रथ यात्रा
11 जनवरी को ब्रह्मोत्सव अपने चरम पर पहुंच जाएगा। इस दिन गोदा-रंगनाथ भगवान का विवाह उत्सव पूरे पारंपरिक विधि-विधान के साथ संपन्न होगा। सुबह बैंड-बाजे और आतिशबाजी के साथ भगवान का बाना विद्या पैलेस से निकलेगा।
बड़ी संख्या में श्रद्धालु बाराती बनकर विवाह उत्सव में शामिल होंगे। पूरे क्षेत्र में किसी पारंपरिक विवाह जैसा उल्लास और उमंग दिखाई देगी। शाम 5 बजे भगवान श्री वेंकटेश बालाजी श्रीदेवी और भू देवी के साथ रथ पर आरूढ़ होकर नगर भ्रमण करेंगे, जिसे देखने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु उमड़ पड़ते हैं।
चौथा दिन: चक्र स्नान और 108 कलशों से महाभिषेक के साथ समापन
12 जनवरी को चार दिवसीय ब्रह्मोत्सव का श्रद्धापूर्वक समापन होगा। इस दिन चक्र स्नान के बाद भगवान वेंकटेश का 108 कलशों से महाभिषेक किया जाएगा। वैष्णव परंपरा में चक्र स्नान को शुद्धि और पुण्य प्राप्ति का प्रतीक माना जाता है।
समापन के दिन भी मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की उपस्थिति बनी रहती है। भक्त भगवान से सुख, शांति और समृद्धि की कामना करते हुए ब्रह्मोत्सव की स्मृतियों के साथ विदाई लेते हैं। यह दिन भक्तों के लिए आध्यात्मिक शांति और संतोष का अनुभव कराता है।
ब्रह्मोत्सव का धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व
श्री पद्मावती वेंकटेश देवस्थानम में आयोजित ब्रह्मोत्सव वैष्णव परंपरा का जीवंत स्वरूप है। इस आयोजन के माध्यम से श्रद्धालु भगवान से सीधा जुड़ाव महसूस करते हैं। बच्चे, युवा और बुजुर्ग हर वर्ग की भागीदारी इसे सामूहिक आस्था का पर्व बनाती है।
ऐसे धार्मिक आयोजन समाज में आस्था, अनुशासन और सेवा भाव को मजबूत करते हैं। ब्रह्मोत्सव के दौरान भक्ति, अनुशासन और सेवा भाव का संगम स्पष्ट रूप से दिखाई देता है, जो इंदौर की धार्मिक संस्कृति को और समृद्ध करता है।





