इंदौर के रानीपुरा इलाके में हुए बिल्डिंग हादसे पर सियासत शुरु हो गई है। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने आरोप लगाया कि इंदौर में बीजेपी संरक्षण में माफिया राज चल रहा है। उन्होंने कहा कि बिल्डरों को आम लोगों की जान लेने का लाइसेंस दिया जा रहा है।
उनके इस आरोप के जवाब में मध्यप्रदेश के कैबिनेट मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने पलटवार किया है। उन्होने कहा कि जीतू पटवारी सामान्य ज्ञान के अभाव में इस तरह की अनर्गल बातें कर रहे हैं। इसी के साथ उन्होंने बताया कि नगर निगम को ऐसे मकान चिन्हित करने के निर्देश दिए गए हैं जिनके भविष्य में ढहने की आशंका है।
जीतू पटवारी ने बीजेपी पर लगाए आरोप
इंदौर में एक पुरानी बिल्डिंग के गिरने से हुए जानमाल के नुकसान का आंकलन जारी है। इस बीच कांग्रेस ने बीजेपी सरकार के साथ स्थानीय प्रशासन को भी सवालों के घेरे में लिया है। जीतू पटवारी ने कहा कि मां अहिल्याबाई की प्राचीन नगरी इंदौर में नेताओं और भूमाफियाओं का आतंक बढ़ता जा रहा है। कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि “अवैध बिल्डिंग बनाकर यहां लोगों की हत्या की जा रही है। ट्रैफिक की स्थिति से लोग परेशान हैं। हर तरफ अव्यवस्था है नशा है। एक तरह से गुंडे बदमाशों का माफिया का राज है। ये चिंता का विषय है। वहां के विधायकों का बीजेपी के नेताओं का सत्ता के संरक्षण में किस तरह का तांडव हो रहा है। जिस तरह की घटनाएं इंदौर में हो रही है वो शहर को शर्मसार कर रही है। इंदौर के लोगों ने जो एकतरफा वोट दिया है बीजेपी के लोग इसका बदला ले रहे हैं। दस साल पुरानी बिल्डिंग गिर गई..नगर निगम बिल्डरों को आम लोगों की जान लेने का लाइसेंस दे रही है।” उन्होंने आरोप लगाया कि प्रशासन, बीजेपी के जीतने वाले जनप्रतिनिधि और इनसे जुड़े हुए लोग रोज आम गरीब जनता की हत्या कर रहे हैं।
कैलाश विजयवर्गीय का पलटवार
इस आरोप के जवाब में मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने कहा है कि कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने सामान्य ज्ञान की कमी के कारण इस तरह का अनर्गल बयान दिया है। उन्होंने कहा कि “ये बस्ती बहुत पुरानी है लगभग 40-50 साल पुरानी। पहले वहां पर सिंगल स्टोरी मकान थे। अल्पसंख्यक वर्ग की पुरानी अवैध बस्ती है। ये बात सही है कि जैसे जैसे उनकी आय और परिवार बढ़ता गया तो उन्होंने वहां बिना परमिशन के डबल और ट्रिपल स्टोरी बना ली। हमने नगर निगम से कहा है कि ऐसे मकान जिनकी भविष्य में गिरने का संभावना है उन्हें आइडेंटिफाई कर घोषित करें कि वो रहने लायक नहीं हैं और अगर हटा सकते हैं तो ऐसे मकानों को हटा दें।”





