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ग्रीनलैंड पर तनाव: 7 यूरोपीय देशों ने भेजे सिर्फ 40 सैनिक, इटली ने इसे मजाक बताया

Written by:Rishabh Namdev
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अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप की ग्रीनलैंड पर कब्जे की धमकियों के बीच यूरोपीय देशों ने प्रतीकात्मक सैन्य तैनाती की है, जिसका इटली ने मजाक उड़ाया है। ब्रिटेन ने सिर्फ एक सैनिक भेजा है। इसके जवाब में ट्रंप ने 8 यूरोपीय देशों पर टैरिफ लगा दिया है, जिससे एक बड़े व्यापार युद्ध का खतरा पैदा हो गया है।
ग्रीनलैंड पर तनाव: 7 यूरोपीय देशों ने भेजे सिर्फ 40 सैनिक, इटली ने इसे मजाक बताया

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ग्रीनलैंड पर नजर के बाद यूरोपीय देशों की ‘सैन्य एकजुटता’ चर्चा और मजाक का विषय बन गई है। ग्रीनलैंड की सुरक्षा के नाम पर ब्रिटेन ने सिर्फ एक सैनिक भेजा है, जबकि सात यूरोपीय देशों ने कुल मिलाकर लगभग 40 सैनिक ही भेजे हैं। इस छोटे से सैन्य दल की तैनाती को इटली ने एक मजाक करार दिया है, जिसके बाद यह पूरा मामला और गरमा गया है।

इसके जवाब में राष्ट्रपति ट्रंप ने जवाबी कार्रवाई करते हुए 8 यूरोपीय देशों पर 10% टैरिफ लगाने का ऐलान कर दिया है, जिससे आर्कटिक में शुरू हुआ यह सैन्य तनाव अब एक व्यापार युद्ध में बदलता दिख रहा है।

‘ऑपरेशन आर्कटिक एंड्योरेंस’ और NATO में फूट

रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, डेनमार्क की अगुवाई में ‘ऑपरेशन आर्कटिक एंड्योरेंस’ नाम से एक संयुक्त सैन्य अभ्यास शुरू किया गया है। इसमें डेनमार्क, नॉर्वे, फिनलैंड, स्वीडन, जर्मनी, फ्रांस, नीदरलैंड्स और ब्रिटेन जैसे NATO देश शामिल हैं। इसी अभ्यास के तहत ये सैनिक ग्रीनलैंड की राजधानी नुउक पहुंचे हैं।

हालांकि, इस पूरी कवायद पर इटली के रक्षा मंत्री गुइडो क्रोसेत्तो ने सवाल उठाया है। उन्होंने इसे एक मजाक बताते हुए कहा कि इतनी कम संख्या में सैनिकों को भेजना किसी भी तरह से गंभीर सैन्य प्रतिक्रिया नहीं है। NATO के अन्य प्रमुख सदस्य जैसे पोलैंड और तुर्किए ने भी इस मिशन से दूरी बना ली है। पोलैंड ने अपनी पूर्वी सीमा पर रूस से बढ़ते खतरे को प्राथमिकता देते हुए सैनिक भेजने से इनकार कर दिया है।

यह सिर्फ एक राजनीतिक संदेश है: फ्रांस

फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने इस छोटी सैन्य तैनाती का बचाव किया है। उन्होंने कहा कि सैनिकों की संख्या भले ही कम हो, लेकिन यह एक राजनीतिक संदेश देने के लिए है कि NATO एकजुट है। इस अभ्यास का मुख्य उद्देश्य यह परखना है कि भविष्य में ग्रीनलैंड में बड़ी संख्या में सैनिकों की तैनाती की जरूरत पड़ने पर तैयारी कैसी होगी। डेनमार्क के रक्षा मंत्रालय के मुताबिक, इसका लक्ष्य आर्कटिक क्षेत्र में सहयोगी देशों के बीच तालमेल बढ़ाना है।

ग्रीनलैंड की सुरक्षा और अमेरिकी मौजूदगी

ग्रीनलैंड की अपनी कोई सेना नहीं है। यह डेनमार्क का एक स्वायत्त क्षेत्र है और इसकी रक्षा की जिम्मेदारी डेनमार्क की है। यहां पहले से ही अमेरिका और डेनमार्क के सैनिक मौजूद हैं।

  • अमेरिकी सैनिक: अमेरिका का पिटुफिक स्पेस बेस (थुले एयर बेस) यहां स्थित है, जो उसका सबसे उत्तरी सैन्य अड्डा है। यहां लगभग 150 से 200 अमेरिकी सैनिक तैनात हैं, जो मिसाइल चेतावनी और अंतरिक्ष निगरानी का काम करते हैं।
  • डेनिश सैनिक: डेनमार्क की जॉइंट आर्कटिक कमांड के तहत यहां करीब 150-200 कर्मी तैनात हैं। इसमें 14 सदस्यीय ‘सीरियस डॉग स्लेज पेट्रोल’ भी शामिल है, जो आर्कटिक में गश्त करती है।

ट्रंप का टैरिफ वाला दांव

सैन्य तैनाती की इस खींचतान के बीच डोनाल्ड ट्रंप ने आर्थिक मोर्चा खोल दिया है। उन्होंने 8 यूरोपीय देशों पर 10% टैरिफ लगा दिया है जो 1 फरवरी से लागू होगा। इन देशों में डेनमार्क, नॉर्वे, स्वीडन, फ्रांस, जर्मनी, यूके, नीदरलैंड और फिनलैंड शामिल हैं।

ट्रंप ने चेतावनी दी है कि अगर ग्रीनलैंड को लेकर कोई समझौता नहीं हुआ तो 1 जून से यह टैरिफ 25% तक बढ़ाया जा सकता है।

यूरोपीय संघ भी जवाबी तैयारी में

ट्रंप के टैरिफ के जवाब में यूरोपीय संघ (EU) भी जवाबी कार्रवाई की तैयारी कर रहा है। EU अमेरिकी उत्पादों पर व्यापारिक पाबंदियां लगाने पर विचार कर रहा है, जिसे ‘ट्रेड बाजूका’ कहा जा रहा है। इसके अलावा, यूरोपीय संसद के सदस्य अमेरिका के साथ एक व्यापार समझौते को रोकने की मांग कर रहे हैं, जिसमें अमेरिकी उत्पादों पर 0% टैरिफ का प्रावधान है।

यूरोपियन पीपुल्स पार्टी (EPP) के अध्यक्ष मैनफ्रेड वेबर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर कहा कि ट्रंप की धमकियों के कारण अब इस समझौते को मंजूरी देना संभव नहीं है।