जर्मनी की पूर्व चांसलर एंजेला मर्केल ने मनमोहन सिंह के आर्थिक सुधारों की तारीफ की, कहा- उनके फैसलों ने भारत को 30 साल की तरक्की दी

जर्मनी की पूर्व चांसलर एंजेला मर्केल ने दिल्ली में आयोजित पहले डॉ. मनमोहन सिंह मेमोरियल लेक्चर में भारत के पूर्व प्रधानमंत्री के साहसिक आर्थिक सुधारों की जमकर सराहना की। उन्होंने कहा कि 1991 में मनमोहन सिंह द्वारा उठाए गए कदमों ने ही भारत को करीब 30 साल की आर्थिक तरक्की की राह पर डाला।
Angela Merkel

नई दिल्ली: जर्मनी की पूर्व चांसलर एंजेला मर्केल ने भारत के पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय डॉ. मनमोहन सिंह को याद करते हुए उनके द्वारा शुरू किए गए आर्थिक सुधारों को देश के लिए एक निर्णायक मोड़ बताया। दिल्ली में आयोजित पहले डॉ. मनमोहन सिंह मेमोरियल लेक्चर में बोलते हुए उन्होंने कहा कि मनमोहन सिंह के साहसिक फैसलों ने भारत को तीन दशकों के अभूतपूर्व आर्थिक विकास के रास्ते पर स्थापित किया।

मर्केल ने इस बात पर जोर दिया कि भारत में विकास की जबरदस्त क्षमता है और यह दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में से एक है। उन्होंने कहा, “दुनिया का सबसे ज्यादा आबादी वाला देश होने के बावजूद, भारत ने पिछले कुछ सालों में 5 फीसदी से ज्यादा की ग्रोथ रेट बनाए रखी है, जो काबिले-तारीफ है।”

जब मनमोहन सिंह ने बदले भारत के आर्थिक नियम

एंजेला मर्केल ने 1991 से 1996 के उस दौर को याद किया जब मनमोहन सिंह भारत के वित्त मंत्री थे। उन्होंने कहा कि उस समय भारत एक गंभीर आर्थिक संकट से जूझ रहा था, लेकिन सिंह ने साहसिक सुधारों की एक श्रृंखला शुरू की। मर्केल के अनुसार, इन सुधारों में विदेशी मुद्रा नियमों को आसान बनाना, लालफीताशाही को खत्म करना और भारतीय बाजार को विदेशी निवेशकों के लिए खोलना शामिल था।

“इन प्रयासों से उन्हें अर्थव्यवस्था को स्थिर करने में मदद मिली। इन सुधारों की वजह से ही भारत के लिए करीब 30 साल की आर्थिक तरक्की देखना मुमकिन हो पाया।”- एंजेला मर्केल, पूर्व चांसलर, जर्मनी

उन्होंने बताया कि इन्हीं कदमों की बदौलत भारतीय अर्थव्यवस्था न केवल संकट से उबरी, बल्कि एक मजबूत विकास की नींव भी रखी गई, जिसका लाभ देश को लंबे समय तक मिला।

क्योटो प्रोटोकॉल और भारत-EU ट्रेड एग्रीमेंट

अपने संबोधन में मर्केल ने मनमोहन सिंह के साथ अपने पुराने संवाद को भी याद किया। उन्होंने क्योटो प्रोटोकॉल के बाद का एक किस्सा साझा करते हुए कहा, “मैंने तब अपनी निराशा जताई थी जब भारत ने बाइंडिंग CO2 उत्सर्जन कटौती को स्वीकार नहीं किया था। तब मनमोहन सिंह ने कहा था कि ‘भारतीय संसद कभी भी बाइंडिंग CO2 कटौती को स्वीकार नहीं करेगी।’ मैं इससे बहुत खुश नहीं थी।”

इसके अलावा, उन्होंने हाल ही में भारत और यूरोपीय संघ (EU) के बीच हुए मुक्त व्यापार समझौते (FTA) की भी प्रशंसा की। उन्होंने याद दिलाया कि इस समझौते को आगे बढ़ाने में उनका भी कुछ योगदान था। मर्केल ने कहा कि भारत की युवा आबादी उसे एक बड़ा डेमोग्राफिक फायदा देती है और इसका भविष्य बहुत अच्छा है।

‘आंकड़े खुद बोलते हैं’

मर्केल ने अपने भाषण में राजनीतिक मामलों पर टिप्पणी करने से परहेज किया, लेकिन उन्होंने मनमोहन सिंह के प्रधानमंत्री कार्यकाल के आंकड़ों का हवाला जरूर दिया। उन्होंने कहा, “जब 2004 में मनमोहन सिंह ने प्रधानमंत्री का पद संभाला था, तो भारत की प्रति व्यक्ति आय 624 डॉलर थी। जब उन्होंने 2014 में पद छोड़ा, तो यह ढाई गुना बढ़कर 1,553 अमेरिकी डॉलर हो गई थी। मुझे लगता है कि ये नंबर खुद बोलते हैं।” उन्होंने मनमोहन सिंह के साधारण शुरुआत से देश का नेतृत्व करने तक के प्रेरक जीवन की भी सराहना की।

Banshika Sharma
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मेरा नाम बंशिका शर्मा है। मैं एमपी ब्रेकिंग न्यूज़ में कंटेंट राइटर के तौर पर काम करती हूँ। मुझे समाज, राजनीति और आम लोगों से जुड़ी कहानियाँ लिखना पसंद है। कोशिश रहती है कि मेरी लिखी खबरें सरल भाषा में हों, ताकि हर पाठक उन्हें आसानी से समझ सके। View all posts by Banshika Sharma →
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