
Madhya Pradesh Police has recovered 301 lost mobile
जापान देश तकनीक और आधुनिकता में दुनिया में सबसे आगे माना जाता है। यहां हर उम्र के लोग मोबाइल, टैबलेट और कंप्यूटर का इस्तेमाल दिनभर करते रहते हैं। छोटे बच्चे से लेकर बड़े-बुजुर्ग तक ज्यादातर समय स्क्रीन पर ही बिताते हैं। पढ़ाई हो या काम… दोस्तों से बातचीत हो या सोशल मीडिया… हर काम अब फोन या टैबलेट के बिना मुश्किल लगता है। लेकिन जरा सोचिए अगर अचानक आपके पास दिनभर में सिर्फ दो घंटे फोन इस्तेमाल करने की अनुमति हो, बाकी समय मोबाइल का इस्तेमाल बिलकुल बंद कर दिया जाए तो क्या होगा। जिस तरह से आजकल के लोग डिजिटल जमाने के आदि हो चुके हैं वैसे में बिना फोन के उनका मानिकल संतुलन भी बिगड़ सकता है।
आपको यह जानकर हैरानी होगी कि यह नियम जापान के आइची शहर में लागू किया गया है, जिसने लोगों की दिनचर्या ही बदल दी है। जी हां! यह सुनकर इसपर विश्वास करना थोड़ा सा मुश्किल है, लेकिन यह कदम वहां के मेयर ने उठाया है।
1 अक्टूबर से नियम लागू
मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो यह नियम 1 अक्टूबर से लागू हुआ है। दरअसल, आइची शहर की मेयर मासाफुमी कोकी ने यह आदेश जारी किया। उनका कहना था कि लोग दिन-रात स्क्रीन देखते रहते हैं। जिस कारण नींद पूरी नहीं होती है, जिसका स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ता है। खासकर बच्चों की सेहत और पढ़ाई प्रभावित होती है। इसलिए उन्होंने तय किया कि 6 से 12 साल के बच्चों को रात 9 बजे के बाद फोन या टैबलेट इस्तेमाल करने की इजाजत नहीं होगी। वहीं, 12 साल से अधिक उम्र वाले 10 बजे तक ही अपने डिवाइस इस्तेमाल कर सकते हैं।
जानें उद्देश्य
मेयर ने स्थानीय मीडिया को जानकारी देते हुए बताया कि उनका उद्देश्य सेहत के लिए फोन बंद करने के साथ-साथ लोगों को अपना समय परिवार के साथ बिताने और स्वस्थ दिनचर्या अपनाने के लिए भी प्रेरित करना है। उन्होंने लोगों को ईमेल भेजकर कहा कि जितना समय आप फोन पर बिताते हैं, उसकी जगह किताबें पढ़ें, जिम जाएं या किसी फिजिकल एक्टिविटी में हिस्सा लें। इस एक निर्णय से लोगों के जीवन में सकारात्मक परिणाम देखने को मिलेगा। हालांकि, सफर इतना आसान नहीं है, जितना सुनने में लग रहा है, लेकिन कोशिश की जाए तो कुछ भी मुश्किल नहीं रह जाता है।
लोगों ने दी प्रतिक्रियाएं
जैसा कि हमेशा से होता आया है, शासनिक नियमों को बनाने पर लोग इसपर अपनी अलग-अलग प्रतिक्रियाएं भी देते हैं। यहां भी कुछ ऐसा ही हुआ है। कुछ लोग इस नियम के बनाए जाने पर खुश हैं, जबकि कुछ इसे बकवास और गैरजरूरी कह रहे हैं। स्थानीय नेता ने तो इस नियम की आलोचना करते हुए कहा कि यह मेयर का काम नहीं है। वहीं, कई लोग इसका समर्थन भी कर रहे हैं। मामले को लेकर स्थानीय नागरिक शोकी मोरियामा कहते हैं कि अब फोन कम इस्तेमाल करने से उनका दिन बड़ा महसूस होता है। विश्वविद्यालय के छात्र अकारी सैतो भी मानते हैं कि ट्रेन में फोन का इस्तेमाल न कर पाना मुश्किल था, लेकिन अब दिन अच्छा बीतता है।
An ordinance limiting screen time for residents of Toyoake, Aichi Prefecture, is making it one of the first cities in the nation to have the government try to get its citizens to put down their phones. | via @nytimes https://t.co/g6aLHDWvcH
— The Japan Times (@japantimes) October 2, 2025
दिख रहे बदलाव
इस नियम के फायदे भी दिखने लगे हैं। जिन लोगों ने फोन इस्तेमाल कम किया, उनका ध्यान और काम करने की क्षमता बढ़ी। नींद की क्वालिटी में भी सुधार हुआ है। इसके साथ ही उन्हें मानसिक शांति भी मिल रही है। इसके अलावा, वह अपने परिवार, दोस्त और समाज में लोगों के साथ समय बिता रहे हैं। हालांकि, चुनौती यह है कि लोग अपने पुराने आदतों को बदलें। सुबह उठते ही फोन देखना और रात को सोने से पहले स्क्रीन इस्तेमाल करना एक आदत बन चुकी है। इसे बदलने के लिए धीरे-धीरे समय कम करना और डिवाइस को सीमित समय तक इस्तेमाल करना जरूरी है।
आप भी करें फोन टाइम लिमिट सेट
बता दें कि ऐसा करके आइची शहर ने एक मिसाल पेश की है कि तकनीक भले जरूरी हो, लेकिन उसके चलते स्वास्थ्य और जीवनशैली की अनदेखी नहीं हो सकती। ऐसे में अगर जापान जैसे विकसित देश के इस छोटे शहर में फोन टाइम लिमिट हो सकती है, तो हम भी अपनी दिनचर्या में बैलेंस ला सकते हैं। इसके लिए बस समय निकालकर स्क्रीन से खुद को दूर रखना है, अपने परिवार और खुद के लिए कुछ एक्टिविटीज करते रहना है। क्योंकि जिंदगी जीने के लिए एक ही मौका मिला है, वो भी अपनों से दूर होकर जिएं, तो बाद में पछतावा के अलावा कुछ नहीं मिलेगा। इसलिए समय रहते चीजों में सुधार लाएं।
सीनियर कंटेंट राइटर · डिप्लोमा इन मास कम्युनिकेशन, बीए. 2022 से MP Breaking News में; पहले लाइव इंडिया, VIP News Channel और Khabar Bharat में कार्य.



