पाकिस्तान की सरजमीं पर दशकों बाद एक अद्भुत बदलाव देखने को मिल रहा है। दरअसल लाहौर की ऐतिहासिक गलियां, जो कभी अपनी पहचान खो चुकी थीं, अब फिर से अपने मूल और प्राचीन नामों को धारण कर रही हैं। यह सिर्फ नाम बदलना नहीं, बल्कि एक सांस्कृतिक पुनरुत्थान का प्रतीक है। पंजाब सरकार ने लाहौर की विभाजन-पूर्व विरासत को पुनर्जीवित करने का संकल्प लिया है, जिसके तहत कई सड़कों और गलियों के पुराने नाम बहाल किए जा रहे हैं।
अब पाकिस्तान में भी होगी राम गली
दरअसल रहमान गली अब ‘राम गली’ बन गई है, सुन्नत नगर को ‘संत नगर’ का नया रूप मिला है, मौलाना जफर अली खान चौक ने ‘लक्ष्मी चौक’ की अपनी पुरानी पहचान पाई है, और मुस्तफाबाद ‘धर्मपुरा’ के रूप में फिर से जाना जाएगा। यह परिवर्तन केवल एक घोषणा नहीं, बल्कि इतिहास के पन्नों को पलटने जैसा है। सोमवार, 18 मई, 2026 को एक अधिकारी ने बताया कि मुख्यमंत्री मरियम नवाज की अध्यक्षता में हुई बैठक में इस योजना को मंजूरी दी गई थी। इस निर्णय के पीछे शहर की विभाजन-पूर्व आत्मा को फिर से जीवंत करने का गहरा उद्देश्य छिपा है।
जानिए क्या है कारण?
पिछले कई दशकों में, लाहौर की अनेकों ऐतिहासिक सड़कों और गलियों के नाम बदल दिए गए थे। ब्रिटिशकालीन और हिंदू धर्म से जुड़े नामों को हटाकर इस्लामी, पाकिस्तानी या स्थानीय हस्तियों से जुड़े नए नाम दे दिए गए थे, जिससे शहर की प्राचीन पहचान कहीं गुम हो गई थी। पंजाब सरकार के एक अधिकारी ने जानकारी दी कि कुछ दिन पहले मुख्यमंत्री मरियम नवाज की अध्यक्षता में हुई पंजाब कैबिनेट की बैठक में लाहौर और उसके आसपास के इलाकों की विभिन्न सड़कों और गलियों के मूल और ऐतिहासिक नामों को बहाल करने की योजना को मंजूरी दी गई थी। उन्होंने कहा कि यह निर्णय इस ऐतिहासिक शहर की सांस्कृतिक पहचान और विरासत को पुनर्जीवित करने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है।
पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ कर रहे हैं नेतृत्व
इस महत्वपूर्ण पहल का नेतृत्व पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ कर रहे हैं, जो लाहौर विरासत क्षेत्र पुनरुद्धार परियोजना के प्रमुख भी हैं। उनके इस दूरदर्शी प्रस्ताव को पिछले सप्ताह कैबिनेट की मंजूरी मिल गई थी। जिन ऐतिहासिक गलियों और सड़कों के नाम पिछली सरकारों द्वारा बदल दिए गए थे, उनमें क्वींस रोड, जेल रोड, डेविस रोड, लॉरेंस रोड, एम्प्रेस रोड, कृष्ण नगर, संत नगर, धरमपुरा, ब्रैंडरेथ रोड, राम गली, टेम्पबेल स्ट्रीट, लक्ष्मी चौक, जैन मंदिर रोड, कुम्हारपुरा, मोहन लाल बाजार, सुंदर दास रोड, भगवान पुरा, शांति नगर और आउटफॉल रोड जैसे नाम शामिल थे। इन नामों की वापसी से शहर के पुराने गौरव को फिर से स्थापित करने का प्रयास किया जा रहा है।
शरीफ ने मिंटो पार्क (जिसे अब ग्रेटर इकबाल पार्क के नाम से जाना जाता है) में तीन क्रिकेट मैदानों और एक पारंपरिक ‘अखाड़ा’ (कुश्ती अखाड़ा) के जीर्णोद्धार का भी प्रस्ताव रखा है। इस कदम को व्यापक रूप से पिछली गलतियों की भरपाई और विरासत को सहेजने की रणनीति के रूप में देखा जा रहा है। गौरतलब है कि उनके भाई, प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ को 2015 में पंजाब के मुख्यमंत्री के रूप में अपने कार्यकाल के दौरान शहरी विकास कार्यक्रम के तहत इन तीन ऐतिहासिक क्रिकेट मैदानों, क्रिकेट क्लबों के अंतर्गत आने वाले क्षेत्रों और कुश्ती अखाड़े को ध्वस्त करने के लिए कड़ी आलोचना का सामना करना पड़ा था।
भारतीय क्रिकेटर लाला अमरनाथ भी रहे हिस्सा
पाकिस्तानी क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान इंजमाम-उल-हक जैसे कई दिग्गजों ने मिंटो पार्क के इन क्रिकेट क्लबों में ही प्रशिक्षण प्राप्त किया था। विभाजन से पहले, भारतीय क्रिकेटर लाला अमरनाथ भी इन क्लबों में प्रशिक्षण लेने आते थे। जब अमरनाथ 1978 में भारतीय क्रिकेट टीम के साथ लाहौर गए थे, तो वे मिंटो पार्क गए और ‘क्रिसेंट क्रिकेट क्लब’ के खिलाड़ियों के साथ समय बिताया, जहां वे देश के विभाजन तक खेलते थे। मिंटो पार्क में ध्वस्त हो चुके कुश्ती के अखाड़े में कभी गूंगा पहलवान, इमाम बख्श और गामा पहलवान जैसे महान पहलवानों के मुकाबले होते थे, जिनकी यादें आज भी लाहौर की मिट्टी में बसी हैं। विभाजन से पहले, हिंदू समुदाय मिंटो पार्क में बड़े उत्साह के साथ दशहरा का त्योहार मनाते थे, जो इस जगह के बहुसांस्कृतिक इतिहास का एक महत्वपूर्ण हिस्सा था। इस पहल से लाहौर की सदियों पुरानी गंगा-जमुनी तहजीब को फिर से सजीव करने का प्रयास किया जा रहा है।






