अमेरिका में ट्रंप प्रशासन ने एक बड़ा फैसला लेते हुए 75 देशों के वीजा आवेदनों की प्रोसेसिंग पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है। यह प्रतिबंध 21 जनवरी से अनिश्चित काल के लिए लागू होगा। इस कदम का मुख्य उद्देश्य उन विदेशी नागरिकों को अमेरिका में प्रवेश से रोकना है, जिनके सरकारी सहायता यानी ‘पब्लिक चार्ज’ पर निर्भर होने की आशंका है।
मीडिया की रिपोर्ट के अनुसार, इस संबंध में अमेरिकी दूतावासों को एक ज्ञापन भेजा गया है, जिसमें मौजूदा कानूनों के तहत वीजा देने से इनकार करने का निर्देश दिया गया है। यह फैसला ट्रंप प्रशासन के उस व्यापक इमिग्रेशन अभियान का हिस्सा है, जिसे उन्होंने पद संभालने के बाद से ही आगे बढ़ाया है।
क्यों लिया गया यह फैसला?
अमेरिकी प्रशासन का यह कदम ‘पब्लिक चार्ज’ प्रावधान को सख्ती से लागू करने की रणनीति का हिस्सा है। इसके तहत उन लोगों को वीजा देने से इनकार किया जाता है, जिनके भविष्य में सरकारी सुविधाओं पर निर्भर रहने की संभावना हो। आवेदकों की जांच के दौरान अब उनकी स्वास्थ्य, उम्र, अंग्रेजी भाषा की क्षमता और लंबी अवधि की चिकित्सा जरूरतों जैसे पहलुओं पर भी विचार किया जाएगा।
“अमेरिका अपनी पुरानी शक्तियों का इस्तेमाल उन लोगों को रोकने के लिए करेगा, जो अमेरिकी जनता का फायदा उठाकर कल्याणकारी योजनाओं पर निर्भर हो जाते हैं।” — टॉमी पिगॉट, विदेश विभाग के प्रवक्ता
भारत को राहत, पाकिस्तान-रूस लिस्ट में
इस लिस्ट में भारत को शामिल नहीं किया गया है, जो एक बड़ी राहत की बात है। हालांकि, सूची में अमेरिका के कई प्रमुख सहयोगी और प्रतिद्वंद्वी देश शामिल हैं। आतंकियों की पनाहगाह माने जाने वाले पाकिस्तान को भी इस सूची में रखा गया है।
अन्य प्रमुख देशों में रूस, ईरान, अफगानिस्तान, इराक, नाइजीरिया, ब्राजील, मिस्र, सोमालिया, सीरिया और यमन जैसे नाम शामिल हैं। इस फैसले के बाद अमेरिकी विभाग वीजा स्क्रीनिंग और जांच की प्रक्रियाओं का नए सिरे से मूल्यांकन करेगा।
इन देशों पर लगा है प्रतिबंध
प्रतिबंधित देशों की सूची में अफगानिस्तान, अल्बानिया, अल्जीरिया, बांग्लादेश, ब्राजील, कंबोडिया, क्यूबा, मिस्र, ईरान, इराक, जमैका, जॉर्डन, कुवैत, लेबनान, लीबिया, मोरक्को, नेपाल, नाइजीरिया, पाकिस्तान, रूस, सोमालिया, सूडान, सीरिया, थाईलैंड, ट्यूनीशिया, उज्बेकिस्तान और यमन समेत कुल 75 देश हैं।





