महकोशल-विंध्य की उपेक्षा से नाराज पूर्व विधायक ने अपनी ही सरकार को घेरा

महकोशल-विंध्य की उपेक्षा से नाराज पूर्व विधायक ने अपनी ही सरकार को घेरा

जबलपुर, संदीप कुमार| महकोशल-विंध्य को अलग प्रदेश बनाने की मांग को लेकर अब सरकार को घेरने की रणनीति तेज हो गई हैं| रीवा के पूर्व भाजपा विधायक लक्ष्मण तिवारी (Laxman Tiwari) भी अब अजय विश्नोई (Ajay Vishnoi) के बाद अपनी ही सरकार को घेरने में जुट गए है| आज जबलपुर (Jabalpur) में मीडिया के सामने उंन्होने अपनी ही सरकार पर गंभीर आरोप लगाए|

पूर्व विधायक ने कहा कि भाजपा मंदिर और राष्ट्रीयता के नाम पर दिखावा कर रही है, महाकोशल-विंध्य से सबसे ज्यादा राजस्व मप्र सरकार के खजाने में आता है इसके बाबजूद दोनों क्षेत्रों की उपेक्षा की जा रही है, वही उंन्होने कहा कि मंत्रीमण्डल में महाकोशल के साथ सौतेला व्यवहार किया गया है जिसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा|

याचनाएं करनी पड़ रही जनप्रतिनिधियों को
जबलपुर में आज पत्रकारों से चर्चा कर रहे भाजपा के पूर्व विधायक ने आरोप लगाया कि महाकोशल-विंध्य के नेताओं को मप्र सरकार के सामने हर एक काम के लिए याचनाएं करनी पड़ रही है, दोनों क्षेत्रों के विकास के नाम पर सिर्फ सरकार ने सपने दिखाएं हैं|

पूर्व विधायक का गंभीर आरोप-सबकुछ तो ले लिया…..
जबलपुर हो या रीवा य फिर महाकोशल-विंध्य कोई भी जिला, सब कुछ तो ले लिया गया है, बडे-बड़े उद्योगों के नाम पर सिर्फ सब्जबाग दिखाए गए, कॉलेज से लेकर बड़े-बड़े संस्थानों का ट्रांसफर इंदौर, उज्जैन, ग्वालियर में कर दिया गया और महाकौशल-विन्ध खाली हाथ सिर्फ एक नया सपना देख रहा है|

अजय विश्नोई भी महाकौशल-विन्ध की उपेक्षा पर उठा चुके हैं सवाल
महाकौशल-विंध्य की लगातार हो रही उपेक्षा को लेकर अपनी ही सरकार को घेरने में जुटे एक और पूर्व विधायक का नाम अब आ गया है, गौरतलब है कि इससे पहले पूर्व मंत्री अजय विश्नोई ने भी महाकौशल और विंध्य की उपेक्षा को देखते हुए अपनी सरकार को घेरने में जुटे हुए थे, लिहाजा अब एक और पूर्व विधायक ने अपनी ही सरकार पर आरोप लगाना शुरू कर दिया है|

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निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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