चीफ जस्टिस एके मित्तल ने किया केंद्रीय जेल निरीक्षण, कैदियों से की वन टू वन चर्चा

चीफ जस्टिस एके मित्तल ने किया केंद्रीय जेल निरीक्षण, कैदियों से की वन टू वन चर्चा

जबलपुर।वाजिद खान।
मध्यप्रदेश हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस ए.के मित्तल ने आज नेताजी सुभाषचंद्र बोस केंद्रीय जेल का निरीक्षण किया।इस दौरान उनके साथ अन्य जस्टिश और महाधिवक्ता शंशाक शेखर भी मौजूद रहे।अपने निरीक्षण के दौरान उन्होंने जेल में बने नव निर्मित कंट्रोल रूम का उद्घाटन भी किया साथ ही कैदियों की समस्या और समाधन के लिए उनसे वन टू वन चर्चा भी की।अपने निरीक्षण के दौरान मीडिया से बात करते हुए चीफ जस्टिस श्री ए.के मित्तल ने कहा कि जेल में फिलहाल ऐसी कोई कमी नही है,जेल परिषर भी साफ सुथरा है जिसके लिए जेल प्रबंधन बधाई का हकदार है,वही जेल में छमता से अधिक कैदी होने को लेकर उन्होंने कहा कि ये सही है कि वर्तमान में ऐसे हालात बने हुए है जिसकी मूख्य वजह एक ये भी है कि जनसंख्या बढ़ने के साथ साथ कैदियों की संख्या भी बढ़ रही है इसको लेकर जेल प्रबंधन को भी देखना होगा कि कैसे जेल में और इंतजामात किए जाए।इधर प्रदेश की अदालतों में बढ़ते लंबित प्रकरणों पर भी उन्होंने चिंता जाहिर की।उन्होंने कहा कि कोशिश की जा रही है कि खाली पड़ी वेकेंसियो को भरा जाए।आज हर जज अपनी छमता से अधिक काम कर रहा है जो कि हाई कोर्ट का डाटा बता रहा है इसके अलावा केशो के निपटारे में भी तेजी आई है जो जजो की मेहनत को दिखा रहा है।

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पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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