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किन्नर के दो गुटों में हुआ विवाद, नकली किन्नरों के खिलाफ जाँच और नियमावली की मांग

Written by:Amit Sengar
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पुलिस प्रशासन इस ज्ञापन पर क्या कदम उठाता है और क्या वाकई में किन्नर समाज के भीतर बढ़ते विवादों को सुलझाने के लिए कोई ठोस पहल की जाती है।
किन्नर के दो गुटों में हुआ विवाद, नकली किन्नरों के खिलाफ जाँच और नियमावली की मांग

Jabalpur News : जबलपुर में किन्नर समाज के भीतर लगातार बढ़ते विवादों के बीच, राधा बाई उर्फ मट्टू किन्नर ने जबलपुर पुलिस अधीक्षक कार्यालय में एक ज्ञापन सौंपा है, जिसमें नकली किन्नरों की पहचान के लिए जांच कराने की मांग की गई है। राधा बाई ने ज्ञापन में कहा है कि जबलपुर में अधिकांश किन्नर असली नहीं हैं, बल्कि कई लोग लिंग परिवर्तन कराकर किन्नर समुदाय में शामिल हो रहे हैं। इन व्यक्तियों द्वारा अवैध वसूली और धमकियों का सहारा लेकर लोगों से अत्यधिक धन की मांग की जा रही है।

उन्होंने बताया कि, कुछ लोग 70-80 हजार रुपये खर्च कर लिंग परिवर्तन और 80 हजार से 1.5 लाख रुपये तक का ऑपरेशन करवा रहे हैं। राधा बाई का कहना है कि ऐसे व्यक्तियों की बढ़ती संख्या के कारण असली और नकली किन्नरों के बीच पहचान करना मुश्किल हो रहा है, और इससे लगातार झगड़े हो रहे हैं। राधा बाई ने सुझाव दिया कि किन्नर समाज के भीतर अवैध वसूली और धमकियों को रोकने के लिए प्रत्येक बधाई या उत्सव के लिए 500 से 1000 रुपये की निश्चित राशि निर्धारित की जाए। इसके साथ ही, उन्होंने मांग की है कि शहर के सभी किन्नरों की मेडिकल जांच कराई जाए ताकि असली और नकली किन्नरों की पहचान हो सके।

ज्ञापन में उल्लेख किया गया है कि कुछ नकली किन्नर लोगों को डराकर 5,000 से 20,000 रुपये तक की अवैध वसूली करते हैं, जिससे शहर में विवाद और झगड़े की स्थिति उत्पन्न होती है। राधा बाई ने पुलिस अधीक्षक से निवेदन किया है कि इन विवादों को समाप्त करने और इलाके में शांति बनाए रखने के लिए एक स्पष्ट नियमावली बनाई जाए, जिससे किन्नरों की वसूली के लिए एक निश्चित दर निर्धारित हो और नकली किन्नरों की पहचान के लिए उचित कार्रवाई की जा सके। पुलिस प्रशासन इस ज्ञापन पर क्या कदम उठाता है और क्या वाकई में किन्नर समाज के भीतर बढ़ते विवादों को सुलझाने के लिए कोई ठोस पहल की जाती है।

जबलपुर से संदीप कुमार की रिपोर्ट

Amit Sengar
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मुझे अपने आप पर गर्व है कि में एक पत्रकार हूँ। क्योंकि पत्रकार होना अपने आप में कलाकार, चिंतक, लेखक या जन-हित में काम करने वाले वकील जैसा होता है। पत्रकार कोई कारोबारी, व्यापारी या राजनेता नहीं होता है वह व्यापक जनता की भलाई के सरोकारों से संचालित होता है। वहीं हेनरी ल्यूस ने कहा है कि “मैं जर्नलिस्ट बना ताकि दुनिया के दिल के अधिक करीब रहूं।” View all posts by Amit Sengar
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