पिछले साल महाकुंभ के दौरान चर्चाओं में आईं सोशल मीडिया इन्फ्लूएंसर हर्षा रिछारिया ने सनातन धर्म के प्रचार-प्रसार से दूरी बनाने और फिर से ग्लैमर की दुनिया में वापस लौटने का ऐलान किया है। जबलपुर पहुंचीं हर्षा ने कहा कि पिछले डेढ़ साल में लगातार विरोध, तिरस्कार, चरित्र हनन और मानसिक दबाव से वे बेहद आहत हैं इसीलिए उन्होंने फैसला लिया है कि वे धार्मिक प्रचार-प्रसार को विराम देकर और अपने पुराने प्रोफेशन में लौट जाएंगीं।
मीडिया से बात करते हुए उन्होंने कहा कि उन्हें गर्व है कि उनका जन्म सनातन हिंदू धर्म में हुआ है। उन्होंने कहा कि ‘मैं अपने धर्म को नहीं छोड़ रही हूं..लेकिन जिस तरह लगभग डेढ़ साल से धर्म का प्रचार कर रही थीं उसपर अब विराम लगा रही हूं।’ हर्षा रिछारिया ने कहा कि इस अवधि में उनके साथ कई तरह का पक्षपात हुआ और उनके विरोध में कई तरह की अनर्गल बातें की गई जिससे वो काफी आहत है। उन्होंने कहा कि जब हम हमारे धर्म के बारे में बात करते हैं तो अपने ही धर्म के लोगों से लड़ना पड़ता है, उनकी के सवालों का जवाब देना पड़ता है।
मौनी अमावस्या के बाद पुराने प्रोफेशन में लौट जाएंगी हर्षा रिछारिया
हर्षा रिछारिया प्रयागराज महाकुंभ के दौरान सोशल मीडिया पर “सबसे सुंदर साध्वी” और “ग्लैमरस साध्वी” के नाम से काफी वायरल हुई थी। उस समय उन्होंने साध्वी के रूप में सनातन धर्म के प्रचार प्रसार का फैसला लिया था। अब एक बार फिर वो बड़ी घोषणा कर सुर्खियों में हैं। मॉडल, एक्टर और इंफ्लुएंसर रही हर्षा ने सनातन धर्म के प्रचार प्रसार और साध्वी जीवन से दूरी बनाने ऐलान कर दिया है। एक निजी कार्यक्रम में जबरपुर पहुंचीं हर्षा ने मकर संक्रांति पर नर्मदा नदी के ग्वारीघाट में स्नान किया और उसके बाद पत्रकारों से बात करते हुए अपने फैसले के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि अठारह जनवरी को मौनी अमावस्या पर प्रयागराज के माघ मेले में वे स्नान करेंगीं और फिर ‘हर हर महादेव’ बोलकर अपने पुराने प्रोफेशन में लौट जाएंगीं।
आत्मसम्मान को पहुंची ठेस, विरोध से आहत हुईं
हर्षा रिछारिया ने कहा है कि पिछले डेढ़ साल से लगातार विरोध, तिरस्कार, चरित्र हनन और मानसिक दबाव से वे काफी आहत हैं। उन्होंने कहा कि कई धर्मगुरुओं और साधु संतों के तिरस्कार और विरोध से उनके आत्मसम्मान को ठेस पहुंची है। हर्षा ने कहा कि पीठ पीछे लोग लगातार उनके विरोध में बातें कर रहे हैं और उन्हें निशाना बनाया जाता रहा है। उन्होंने समाज की सोच पर भी सवाल उठाया और पूछा कि पुरुष प्रधान समाज में किसी भी स्त्री को टार्गेट करने के लिए सबसे पहले उसके चरित्र पर सवाल क्यों किए जाते हैं। हर्षा ने बताया कि वे मौनी अमावस्या के दिन माघ मेले में गंगा स्नान के बाद अपने सनातन धर्म के प्रचार प्रसार की राह छोड़ देंगीं।





