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जबलपुर नर्सिंग कॉलेज फर्जीवाड़ा मामले में हाईकोर्ट सख्त, बिना अनुमति नहीं होंगी परीक्षाएं, जानिए पूरा मामला

Written by:Rishabh Namdev
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मध्य प्रदेश के बहुचर्चित नर्सिंग कॉलेज फर्जीवाड़ा मामले में जबलपुर हाईकोर्ट ने बड़ा फैसला दिया है। दरअसल कोर्ट ने साफ कहा है कि हाईकोर्ट की अनुमति के बिना किसी भी नर्सिंग परीक्षा का आयोजन नहीं किया जाएगा।
जबलपुर नर्सिंग कॉलेज फर्जीवाड़ा मामले में हाईकोर्ट सख्त, बिना अनुमति नहीं होंगी परीक्षाएं, जानिए पूरा मामला

मध्य प्रदेश के नर्सिंग कॉलेज फर्जीवाड़ा मामले में जबलपुर हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। दरअसल अदालत ने कहा है कि बिना हाईकोर्ट की मंजूरी के नर्सिंग कॉलेजों की परीक्षाएं नहीं कराई जाएंगी। वहीं इस फैसले से प्रदेश के करीब 30 हजार से ज्यादा नर्सिंग छात्रों पर सीधा असर पड़ा है। मामले की सुनवाई हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने की जिसमें जस्टिस विवेक अग्रवाल एवं जस्टिस अविनेंद्र कुमार सिंह शामिल थे।

दरअसल सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि जिन कॉलेजों को जांच में अपात्र पाया गया है उनके छात्रों को योग्य कॉलेजों में ट्रांसफर किया जाना चाहिए। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया है कि नर्सिंग काउंसिल को किसी भी परीक्षा से पहले कोर्ट से अनुमति लेनी होगी।

CBI जांच में सामने आई गड़बड़ियां

दरअसल मध्य प्रदेश का यह नर्सिंग कॉलेज फर्जीवाड़ा मामला पिछले कुछ सालों से चर्चा में है। वहीं इस पूरे मामले की जांच CBI को सौंपी गई थी। जांच के दौरान कई चौंकाने वाली बातें सामने आईं। सीबीआई की रिपोर्ट के मुताबिक प्रदेश में करीब 800 नर्सिंग कॉलेजों की जांच की गई थी। इनमें से लगभग 600 कॉलेज ऐसे पाए गए जो तय मानकों पर खरे नहीं उतरे थे। कई कॉलेजों में बुनियादी सुविधाएं तक मौजूद नहीं थीं। रिपोर्ट में बताया गया कि कई संस्थानों में न तो सही बिल्डिंग थी न लैब और न ही लाइब्रेरी थी।

वहीं इसके अलावा कई कॉलेजों के पास 100 बेड वाले अस्पताल की सुविधा भी नहीं थी जो नर्सिंग कोर्स के लिए जरूरी मानी जाती है। वहीं जांच में यह भी सामने आया है कि कई कॉलेज सिर्फ कागजों पर चल रहे थे। कुछ मामलों में तो एक ही शिक्षक या प्रिंसिपल को एक साथ 10 से 15 कॉलेजों में काम करता हुआ दिखाया गया था। इन गड़बड़ियों के बाद छात्रों के भविष्य को लेकर सवाल खड़े होने लगे थे। वहीं कई छात्रों ने आरोप लगाया कि उन्हें ऐसे कॉलेजों में दाखिला दिया गया जहां पढ़ाई और ट्रेनिंग की सही व्यवस्था ही नहीं थी।

छात्रों के भविष्य पर असर

दरअसल इस पूरे मामले में एमपी नर्सिंग रजिस्ट्रेशन कॉउंसिल की भूमिका भी सवालों के घेरे में रही है। वहीं याचिकाकर्ताओं का आरोप था कि जांच में अपात्र पाए गए कॉलेजों के छात्रों को दूसरे कॉलेजों में ट्रांसफर करने के बजाय उनकी परीक्षाएं कराने की तैयारी की जा रही थी। बताया गया कि कुछ कॉलेजों में जीएनएम कोर्स की परीक्षाएं 28 अप्रैल से शुरू कराने की योजना थी। इस पर अदालत ने सख्त रुख अपनाते हुए साफ कर दिया कि बिना हाईकोर्ट की अनुमति के कोई भी परीक्षा आयोजित नहीं की जाएगी।

दरअसल अदालत ने काउंसिल से अंडरटेकिंग लेकर आदेश दिया है कि पहले छात्रों को योग्य कॉलेजों में ट्रांसफर करने की प्रक्रिया पूरी की जाए। इसके बाद ही आगे की परीक्षाओं पर फैसला लिया जाएगा। बता दें कि मामले की अगली सुनवाई अब 28 अप्रैल को तय की गई है जहां मुख्य न्यायाधीश की अगुआई वाली बेंच इस पर आगे की सुनवाई करेगी।

Rishabh Namdev
लेखक के बारे में
मैं ऋषभ नामदेव खेल से लेकर राजनीति तक हर तरह की खबर लिखने में सक्षम हूं। मैं जर्नलिज्म की फील्ड में पिछले 4 साल से काम कर रहा हूं। View all posts by Rishabh Namdev
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