हाई कोर्ट से निजी स्कूलों को झटका, सिर्फ ट्यूशन फीस ही ले सकेंगे, अंतरिम आदेश बरकरार

हाई कोर्ट से निजी स्कूलों को झटका, सिर्फ ट्यूशन फीस ही ले सकेंगे, अंतरिम आदेश बरकरार

जबलपुर, संदीप कुमार| कोरोना काल (Corona Period) में स्कूल फीस (School Fees) वसूलने को लेकर जबलपुर हाईकोर्ट (Jabalpur Highcourt) ने निजी स्कूलों को झटका दिया है| निजी स्कूल (Private School) कोरोना काल में सिर्फ लॉकडाउन (Lockdown) के पहले तय ट्यूशन फीस ही वसूल सकते हैं, अपने अंतिम आदेश को कोर्ट ने बरकरार रखा है| मध्यप्रदेश हाईकोर्ट में गुरुवार को स्कूल फीस के मामले पर एक बार फिर सुनवाई हुई| कोर्ट ने निर्देश दिए हैं कि, संचालकों द्वारा ट्यूशन फीस के अलावा बाकी कोई फीस नहीं वसूली जा सकती है|

कोर्ट ने निर्देश दिए हैं कि ज्यादा फीस ना वसूलने को लेकर स्कूलों को बकायदा शपथ पत्र हाई कोर्ट में जमा करना होगा, लेकिन अब तक स्कूलों ने शपथ पत्र दाखिल नहीं किए हैं, जिसको लेकर कोर्ट ने कड़े लहजे में इस पर आपत्ति जताते हुए स्कूलों से जल्द से जल्द शपथ पत्र जमा करने के लिए कहा है|

इसके साथ ही स्कूलों ने एक अर्जी लगाई थी कि, जब सामान्य ढंग से स्कूल खुलेंगे, तो वे अपनी मासिक फीस वसूल सकेंगे. जिसको लेकर कोर्ट का कहना है कि, पहले शपथ पत्र कोर्ट में जमा करें, उसके बाद आपके दूसरे आवेदन पर बाद में विचार किया जाएगा| फिलहाल इस मामले में अगली सुनवाई 23 सितंबर को होगी|

Gaurav Sharma
लेखक के बारे में
Gaurav Sharma

निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
Follow Us :GoogleNews