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IPS कैडर रिव्यू में लेटलतीफी का मामला, CAT से राज्य पुलिस सेवा के अधिकारियों को बड़ी राहत

Reported by:Sandeep Kumar|Edited by:Atul Saxena
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ट्रिब्यूनल द्वारा आपने आदेश से केंद्र सरकारऔर राज्य सरकार को अतिरिक्त कैडर रिव्यू करने के लिए आदेशित किया है एवं यह प्रक्रिया पूर्ण करने के 120 दिन समय दिया गया है ।
IPS कैडर रिव्यू में लेटलतीफी का मामला, CAT से राज्य पुलिस सेवा के अधिकारियों को बड़ी राहत

CAT Jabalpur

केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण (CAT) जबलपुर पीठ ने मध्यप्रदेश पुलिस एसोसिएशन द्वारा दायर मूल आवेदन को स्वीकार करते हुए केंद्र एवं राज्य सरकार की उस लापरवाही पर कड़ी टिप्पणी की है, जिसमें भारतीय पुलिस सेवा (IPS) कैडर रिव्यू जैसे अनिवार्य वैधानिक कर्तव्य को समय पर पूरा नहीं किया गया। यह याचिका मध्यप्रदेश पुलिस एसोसिएशन की ओर से दायर की गई थी, जिसमें यह मुद्दा उठाया गया कि भारतीय पुलिस सेवा (कैडर) नियम, 1954 के तहत प्रत्येक पाँच वर्ष में कैडर रिव्यू किया जाना अनिवार्य है, किंतु पिछले लगभग दो दशकों से यह प्रक्रिया लगातार विलंबित की जाती रही। इस देरी के कारण राज्य पुलिस सेवा (DSP/ASP) के अनेक पात्र अधिकारी IPS में पदोन्नति/इंडक्शन के अपने संवैधानिक अधिकार से वंचित हो रहे हैं ।

ट्रिब्यूनल ने यह माना कि कैडर रिव्यू कोई औपचारिक या विवेकाधीन कार्य नहीं, बल्कि केंद्र और राज्य सरकार पर डाला गया अनिवार्य दायित्व है। इस दायित्व के निर्वहन में हुई देरी को न तो प्रशासनिक उदासीनता और न ही निष्क्रियता के आधार पर उचित ठहराया जा सकता। ट्रिब्यूनल ने यह भी स्वीकार किया कि इस प्रकार की देरी से अधिकारियों के अनुच्छेद 14 एवं 16 के अंतर्गत प्राप्त समानता और पदोन्नति पर विचार के मौलिक अधिकार प्रभावित होते है।

याचिकाकर्ता ने बताये देरी के नुकसान 

आवेदक की ओर से अधिवक्ता पंकज दुबे तथा अक्षय खंडेलवाल ने यह पक्ष रखा कि सर्वोच्च न्यायालय द्वारा Union of India v. Hemraj Singh Chauhan सहित अनेक निर्णयों में स्पष्ट किया गया है कि कैडर रिव्यू समयबद्ध और अनिवार्य है। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि अन्य राज्यों की तुलना में मध्यप्रदेश के अधिकारी अत्यधिक पिछड़े हुए हैं, जिससे गंभीर असमानता उत्पन्न हुई है। याचिका में यह भी बताया गया कि यदि इसी प्रकार देरी जारी रही तो कई अधिकारी 56 वर्ष की आयु सीमा पार कर जाएंगे और IPS में इंडक्शन का अवसर हमेशा के लिए समाप्त हो जाएगा।

सरकारों की निष्क्रियता पर ट्रिब्यूनल की टिप्पणी 

ट्रिब्यूनल ने इस चिंता को गंभीर मानते हुए सरकारों की निष्क्रियता को अधिकारियों के भविष्य से खिलवाड़ करार दिया। ट्रिब्यूनल द्वारा आपने आदेश से केंद्र सरकारऔर राज्य सरकार को अतिरिक्त कैडर रिव्यू करने के लिए आदेशित किया है एवं यह प्रक्रिया पूर्ण करने के 120 दिन समय दिया गया है । यह निर्णय न केवल राज्य पुलिस सेवा के अधिकारियों के लिए राहतकारी है, बल्कि यह संदेश भी देता है कि वैधानिक दायित्वों की अनदेखी प्रशासन के लिए स्वीकार्य नहीं है। यह आदेश भविष्य में समयबद्ध कैडर रिव्यू सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण नजीर माना जा रहा है। याचिकाकर्ता संगठन की ओर से अधिवक्ता पंकज दुबे एवं अक्षय खंडेलवाल ने पैरवी की ।

संदीप कुमार की रिपोर्ट 

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Atul Saxena
लेखक के बारे में
पत्रकारिता मेरे लिए एक मिशन है, हालाँकि आज की पत्रकारिता ना ब्रह्माण्ड के पहले पत्रकार देवर्षि नारद वाली है और ना ही गणेश शंकर विद्यार्थी वाली, फिर भी मेरा ऐसा मानना है कि यदि खबर को सिर्फ खबर ही रहने दिया जाये तो ये ही सही अर्थों में पत्रकारिता है और मैं इसी मिशन पर पिछले तीन दशकों से ज्यादा समय से लगा हुआ हूँ.... पत्रकारिता के इस भौतिकवादी युग में मेरे जीवन में कई उतार चढ़ाव आये, बहुत सी चुनौतियों का सामना करना पड़ा लेकिन इसके बाद भी ना मैं डरा और ना ही अपने रास्ते से हटा ....पत्रकारिता मेरे जीवन का वो हिस्सा है जिसमें सच्ची और सही ख़बरें मेरी पहचान हैं .... View all posts by Atul Saxena
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