जबलपुर हाईकोर्ट ने ‘बदले की भावना’ वाली FIR रद्द की, रेत माफिया के खिलाफ शिकायत करने वाले व्यापारी को राहत, मंडला पुलिस की लापरवाही पर सवाल

अदालत ने कहा कि इस मामले में पुलिस ने बिना समुचित जांच के कार्रवाई की। जिस समय शंकर लाल पर एफआईआर दर्ज हुई, उस दौरान वे जबलपुर के एक निजी अस्पताल के आईसीयू में गंभीर रूप से घायल अवस्था में भर्ती थे। कोर्ट ने कहा कि ऐसे में उनके द्वारा किसी घटना को अंजाम देना भौतिक रूप से असंभव था।
Jabalpur High Court

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मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने अवैध रेत उत्खनन की शिकायत करने वाले एक व्यापारी पर दर्ज की गई पुलिस FIR को निरस्त कर दिया है। कोर्ट ने इसे ‘ बदले की भावना’ से की गई कार्रवाई मानते हुए पुलिस की गंभीर लापरवाही करार दिया है और मंडला एसपी को आदेश की प्रति भेजने के निर्देश दिए हैं।

मामला मंडला जिले के व्यापारी शंकर लाल से जुड़ा हुआ है। उन्होंने मंडला निवासी सैंटी बरमैया और कपिल साहू पर आरोप लगाया था कि दोनों राजनीतिक संरक्षण में अवैध रेत खनन और व्यापार कर रहे हैं। इसकी लिखित शिकायत कलेक्टर और एसपी से की गई। इसकी शिकायत थाने में करने पर उन्हें जान से मारने की धमकी दी गई।

अस्पताल में भर्ती व्यापारी के विरूद्ध पुलिस ने दर्जी की एफआईआर

जानकारी के अनुसार, 13 जनवरी 2025 को शंकर लाल जब अपने चालक के साथ जबलपुर लौट रहे थे, तब बरेला के पास आरोपियों व उनके सहयोगियों ने उनकी कार रोककर जानलेवा हमला किया। हमले में वे गंभीर रूप से घायल हो गई जिसके बाद ड्राइवर ने उन्हें जबलपुर के एक निजी अस्पताल के आईसीयू में भर्ती कराया। यहां उनके सिर पर 40 से अधिक टांके लगाए गए।

इसी अवधि में आरोपियों की ओर से मंडला पुलिस थाने में शंकर लाल के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई गई। इसके बाद शंकर लाल ने इस मामले में हाईकोर्ट में याचिका दर्ज की। उन्होंने अदालत को बताया कि जिस समय उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज की जा रही थी, तब वह जबलपुर में आईसीयू में भर्ती थे। ऐसी स्थिति में उनके द्वारा घटना को अंजाम देना किसी भी स्थिति में असंभव है।

हाईकोर्ट ने एफआईआर निरस्त की

जबलपुर हाईकोर्ट में जस्टिस बी.पी. शर्मा की बेंच ने मामले की गहन सुनवाई के बाद सारे रिकॉर्ड की जांच की। कोर्ट ने पाया कि पुलिस द्वारा दर्ज एफआईआर पूरी तरह अविश्वसनीय और अस्वाभाविक है। यह स्पष्ट रूप से बदले की भावना से प्रेरित लगती है। कोर्ट ने शंकर लाल के खिलाफ दर्ज एफआईआर को तत्काल निरस्त करते हुए कहा कि यह पुलिस की गंभीर चूक है। कोर्ट ने इसे पुलिस की लापरवाही और अविश्वसनीय कार्रवाई करार देते हुए मंडला एसपी को आदेश की प्रति भेजने के निर्देश दिए हैं।

Shruty Kushwaha
लेखक के बारे में
Shruty Kushwaha

पत्रकारिता में स्नातकोत्तर (M.J.), 2001. 2001 से 2013 तक ईटीवी हैदराबाद, सहारा न्यूज दिल्ली-भोपाल और लाइव इंडिया मुंबई में कार्य.

2001 में माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्वविद्यालय भोपाल से पत्रकारिता में स्नातकोत्तर (M.J, Masters of Journalism)। 2001 से 2013 तक ईटीवी हैदराबाद, सहारा न्यूज दिल्ली-भोपाल, लाइव इंडिया मुंबई में कार्य अनुभव। साहित्य पठन-पाठन में विशेष रूचि। View all posts by Shruty Kushwaha →
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