अवैध रेत नाके पर देर रात चली गोलियां, बाल बाल बचे लोग

अवैध रेत नाके पर देर रात चली गोलियां, बाल बाल बचे लोग

जबलपुर।संदीप कुमार।

जबलपुर में खुले आम अवैध रेत की सप्लाई हो रही है खास बात तो ये है कि रेत माफिया अब अवैध रेत नाका तक बनाकर रु वसूल रहे है वही दूसरी और जिला प्रशासन सहित खनिज विभाग और पुलिस इस पूरे मामले से अनजान बनी हुई है।जबलपुर के शहपुरा में भी देर रात अवैध रेत नाका को लेकर जमकर फायरिंग की गई।अज्ञात आरोपियों ने एक के बाद एक तीन राउंड फायरिंग की और मौके से फरार हो गए।बताया जा रहा है कि हमलावरों के निशाने में अंशुल राजपूत था जो कि अवैध रेत नाका संचालित किया करता था।इधर फायरिंग की सूचना के बाद मौके पर एसडीओपी रोहित केशवानी सहित शहपुरा थाना का बल भी पहुँच गया।पर तब तक आरोपी फरार हो गए थे।स्थानीय लोगो के मुताबिक अवैध रेत नाका का ये कारोबार लंबे समय से चल रहा था और पुलिस को इसकी जानकारी भी थी पर कार्यवाही के नाम पर खनिज विभाग और पुलिस ने चुप्पी साध रखी थी।बहरहाल पुलिस ने अंशुल राजपूत की शिकायत पर अज्ञात हमलावरों के खिलाफ मामला दर्ज कर तलाश शुरू कर दी है वही अंशुल पर भी अवैध रेत नाका संचलित करने के मामले में कार्यवाही की जा रही है।हम आपको बता दे कि हाल ही कलेक्टर भरत यादव ने दावा किया था कि जिले में कही भी अवैध रेत परिवहन नही किया जा रहा है जबकि हकीकत में शहपुरा के नर्मदा घाट से दमोह,छतरपुर,नरसिंहपुर में जमकर अवैध रेत का परिवहन किया जा रहा है और अवैध रेत नाका संचालक 5 हजार से 10 हजार रु तक प्रति डम्फर वसूल कर रहे है।

Gaurav Sharma
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पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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