मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा और जस्टिस विनय सराफ की डिवीजन बेंच ने लॉ आफिसर्स नियुक्ति मामले पर सुनवाई करते हुए सभी 155 लॉ ऑफिसरों और राज्य सरकार को नोटिस जारी किया है। मामले पर अगली सुनवाई अब 2 फरवरी को होगी। दरअसल हाल ही में महाधिवक्ता कार्यालय में 157 लॉ ऑफिसरों की नियुक्तिया हुई थी। जबलपुर निवासी अधिवक्ता योगेश सोनी ने याचिका दायर करते हुए नियुक्तियों पर सवाल खड़े कर दिए।
चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा और जस्टिस विनय सराफ की डिवीजन बेंच ने मामले की गंभीरता को देखते हुए हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष डीके जैन की उस अर्जी को भी स्वीकार कर लिया है, जिसमें दूसरे राज्यों के वकीलों की नियुक्ति पर कड़ा ऐतराज जताया गया है। राज्य सरकार, महाधिवक्ता कार्यालय और सभी नवनियुक्त वकीलों को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है।
दूसरे राज्यों के अधिवक्ताओं की नियुक्ति का विरोध
हाई कोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष डीके जैन ने अपनी अर्जी में नई दिल्ली, उत्तर प्रदेश और राजस्थान जैसे दूसरे राज्यों के वकीलों को मध्य प्रदेश की सूची में शामिल किए जाने पर सवाल उठाए हैं। बार एसोसिएशन का तर्क है कि स्थानीय अधिवक्ताओं की अनदेखी कर अन्य राज्यों के वकीलों को प्राथमिकता देना उचित नहीं है। अदालत ने इस तर्क को रिकॉर्ड पर लेते हुए मामले की अगली सुनवाई फरवरी माह के दूसरे सप्ताह में तय की है।
25 दिसंबर को जारी सूची में नियमों के उल्लंघन के आरोप
याचिकाकर्ता के वकील दिनेश उपाध्याय ने बताया कि 25 दिसंबर को विधि एवं विधायी कार्य विभाग द्वारा जारी सूची में वर्ष 2013 की राजपत्र अधिसूचना के नियमों का स्पष्ट उल्लंघन हुआ है। याचिका के अनुसार, सरकारी वकील की नियुक्ति के लिए एक निर्धारित प्रक्रिया और अनुभव के मानक तय हैं। इसके बावजूद, सूची में ऐसे कई नाम शामिल हैं जिनका वकालत का अनुभव 10 साल से भी कम है, जो कि अनिवार्य नियमों के विरुद्ध है।
संदीप कुमार की रिपोर्ट





