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मंडला जिला अस्पताल में बदहाल स्वास्थ्य व्यवस्थाएं, हाई कोर्ट में जनहित याचिका दायर, राज्य शासन को नोटिस जारी

अस्पताल में कार्डियोलॉजिस्ट, न्यूरोलॉजिस्ट, गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट, यूरोलॉजिस्ट और रेडियोलॉजिस्ट जैसे विशेषज्ञ डॉक्टरों के पद वर्षों से खाली पड़े हैं।
Jabalpur HC

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मंडला जिला अस्पताल की बदहाल स्वास्थ्य व्यवस्थाओं को लेकर मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की गई है। याचिका में आदिवासी बाहुल्य जिले में इलाज की गंभीर बदइंतजामी, डॉक्टरों की भारी कमी और प्रसूति वार्ड की दयनीय स्थिति को लेकर सवाल उठाए गए हैं। मामले की सुनवाई करते हुए चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा और जस्टिस विनय सराफ की डिवीजन बेंच ने राज्य सरकार, स्वास्थ्य विभाग और मंडला सीएमएचओ को नोटिस जारी कर चार सप्ताह में जवाब मांगा है।

याचिकाकर्ता पंकज कुमार सोनी ने हाईकोर्ट को बताया कि मंडला जिले की आबादी करीब 10 लाख है, जिसमें लगभग 70 प्रतिशत आदिवासी समुदाय से हैं। आर्थिक रूप से कमजोर होने के कारण अधिकांश लोग जिला अस्पताल पर ही निर्भर हैं, लेकिन वहां मूलभूत स्वास्थ्य सुविधाओं का भी अभाव है।

याचिकाकर्ता की ओर से पेश अधिवक्ता धनंजय असाटी ने कोर्ट को बताया कि जिला अस्पताल में कार्डियोलॉजिस्ट और रेडियोलॉजिस्ट तक उपलब्ध नहीं हैं। किसी मरीज को गंभीर समस्या होने पर उसे नागपुर या जबलपुर रेफर करना पड़ता है। अस्पताल में डॉक्टरों के 42 पद स्वीकृत हैं, लेकिन वर्तमान में केवल 17 डॉक्टर ही पदस्थ हैं।

वर्षों से खाली पड़े हैं विशेषज्ञ डाक्टरों के पद 

अस्पताल में कार्डियोलॉजिस्ट, न्यूरोलॉजिस्ट, गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट, यूरोलॉजिस्ट और रेडियोलॉजिस्ट जैसे विशेषज्ञ डॉक्टरों के पद वर्षों से खाली पड़े हैं। रेडियोलॉजिस्ट नहीं होने से अस्पताल की सोनोग्राफी मशीनें भी बंद पड़ी हैं, जिससे मरीजों को निजी डायग्नोस्टिक सेंटरों में महंगे टेस्ट कराने पड़ रहे हैं।

याचिका में की गई ये मांग 

याचिका में मांग की गई है कि प्रसूति वार्ड में तत्काल अतिरिक्त बिस्तरों की व्यवस्था की जाये, विशेषज्ञ डॉक्टरों के पद समयबद्ध तरीके से भरे जाएँ और स्वास्थ्य सेवाओं में लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों पर कार्रवाई की जाये।

Atul Saxena
लेखक के बारे में
पत्रकारिता मेरे लिए एक मिशन है, हालाँकि आज की पत्रकारिता ना ब्रह्माण्ड के पहले पत्रकार देवर्षि नारद वाली है और ना ही गणेश शंकर विद्यार्थी वाली, फिर भी मेरा ऐसा मानना है कि यदि खबर को सिर्फ खबर ही रहने दिया जाये तो ये ही सही अर्थों में पत्रकारिता है और मैं इसी मिशन पर पिछले तीन दशकों से ज्यादा समय से लगा हुआ हूँ.... पत्रकारिता के इस भौतिकवादी युग में मेरे जीवन में कई उतार चढ़ाव आये, बहुत सी चुनौतियों का सामना करना पड़ा लेकिन इसके बाद भी ना मैं डरा और ना ही अपने रास्ते से हटा ....पत्रकारिता मेरे जीवन का वो हिस्सा है जिसमें सच्ची और सही ख़बरें मेरी पहचान हैं .... View all posts by Atul Saxena
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