मध्य प्रदेश सरकार ने बरगी बांध में हुई क्रूज दुर्घटना को गंभीरता से लेते हुए उसकी न्यायिक जांच के आदेश जारी कर दिए हैं। इस घटना के बाद से ही जल सुरक्षा और संचालन मानकों को लेकर उठ रहे सवालों के बीच राज्य शासन ने मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति संजय द्विवेदी की अध्यक्षता में एक एकल सदस्यीय जांच आयोग का गठन किया है। यह कदम राज्य में जल परिवहन और पर्यटन से जुड़ी गतिविधियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल मानी जा रही है।
राज्य शासन के सामान्य प्रशासन विभाग ने बरगी बांध क्रूज दुर्घटना की न्यायिक जांच संबंधी अधिसूचना जारी कर दी है। अधिसूचना के अनुसार, सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति संजय द्विवेदी की अध्यक्षता में गठित यह आयोग मध्यप्रदेश राजपत्र में प्रकाशन की तारीख से तीन माह के भीतर अपनी जांच पूरी करेगा और विस्तृत रिपोर्ट राज्य शासन को प्रस्तुत करेगा। इस समय-सीमा का निर्धारण जांच प्रक्रिया में तेजी लाने और जल्द से जल्द तथ्यों को सामने लाने के उद्देश्य से किया गया है।
पांच बिंदुओं के आधार पर होगी जांच
न्यायिक आयोग की बरगी बांध क्रूज दुर्घटना की जांच के लिए पांच प्रमुख बिंदु तय किए गए हैं, जो जांच के दायरे और दिशा को स्पष्ट करते हैं। ये बिंदु दुर्घटना के विभिन्न पहलुओं और भविष्य की सुरक्षा व्यवस्थाओं पर गहराई से विचार करने के लिए बनाए गए हैं:
1. दुर्घटना के कारणों की जांच करना एवं उत्तरदायित्व का निर्धारण: आयोग का प्राथमिक उद्देश्य दुर्घटना के मूल कारणों की गहराई से पड़ताल करना है। इसमें तकनीकी खराबी, मानवीय त्रुटि, सुरक्षा प्रोटोकॉल का उल्लंघन या किसी अन्य कारक की भूमिका की समीक्षा की जाएगी। इसके साथ ही, दुर्घटना के लिए जिम्मेदार व्यक्तियों या संस्थाओं के उत्तरदायित्व का भी स्पष्ट निर्धारण किया जाएगा ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकी जा सके। यह जांच सुनिश्चित करेगी कि लापरवाही बरतने वालों पर उचित कार्रवाई हो और जवाबदेही तय हो।
2. दुर्घटना के दौरान और दुर्घटना के बाद में किए गए बचाव उपायों की पर्याप्तता और राहत कार्यों की समीक्षा: जांच आयोग दुर्घटना के दौरान और उसके बाद किए गए बचाव एवं राहत कार्यों की प्रभावशीलता का भी आकलन करेगा। इसमें यह देखा जाएगा कि आपातकालीन प्रतिक्रिया कितनी त्वरित और कुशल थी, उपलब्ध संसाधन पर्याप्त थे या नहीं, और क्या घायलों को समय पर उचित सहायता मिल पाई। इस समीक्षा का उद्देश्य भविष्य की आपदाओं के लिए बेहतर प्रतिक्रिया तंत्र विकसित करना और आपातकालीन सेवाओं की कमियों को दूर करना है।
3. राज्य में संचालित सभी नौकाओं, क्रूज एवं जल क्रीड़ा गतिविधियों का ऑडिट तथा इनलैंड वेसल्स एक्ट, 2021 एवं एनडीएमए बोट सेफ्टी गाइडलाइंस, 2017 के अनुरूप जलयानों के प्रमाणीकरण की व्यवस्था: यह बिंदु राज्य भर में जल परिवहन और मनोरंजन गतिविधियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। आयोग सभी संचालित नौकाओं, क्रूज और जल क्रीड़ा गतिविधियों का व्यापक ऑडिट करेगा। इसमें विशेष रूप से इनलैंड वेसल्स एक्ट, 2021 (Inland Vessels Act, 2021) और राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एनडीएमए) की बोट सेफ्टी गाइडलाइंस, 2017 (NDMA Boat Safety Guidelines, 2017) के अनुरूप जलयानों के प्रमाणीकरण की व्यवस्था की समीक्षा की जाएगी। इसका लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी जलयान बिना उचित सुरक्षा मानकों और प्रमाणन के संचालित न हो, जिससे यात्रियों की सुरक्षा सर्वोपरि रहे।
4. राज्य में क्रूज, नौकाओं एवं जल क्रीड़ा गतिविधियों के संचालन व रखरखाव हेतु एक समान मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) तैयार करना: वर्तमान में विभिन्न स्थानों पर अलग-अलग नियम-कायदों के कारण सुरक्षा में असमानता देखी जाती है। आयोग का एक महत्वपूर्ण कार्य जल परिवहन और मनोरंजक गतिविधियों के संचालन और रखरखाव के लिए एक एकीकृत और समान मानक संचालन प्रक्रिया (Standard Operating Procedure – SOP) तैयार करना है। यह एसओपी सुरक्षा प्रोटोकॉल, चालक दल के प्रशिक्षण, यात्री क्षमता, रखरखाव अनुसूची और आपातकालीन प्रक्रियाओं को मानकीकृत करेगी, जिससे पूरे राज्य में जल सुरक्षा का स्तर बढ़ेगा और एकरूपता आएगी।
5. ऐसे सभी स्थानों पर जहां नागरिक जल परिवहन, नौका, क्रूज एवं जल क्रीड़ा गतिविधियां संचालित हो रही हैं, त्वरित प्रतिक्रिया दल के गठन की व्यवस्था: उन सभी स्थानों पर जहां नागरिक जल परिवहन, नौका, क्रूज और जल क्रीड़ा गतिविधियां संचालित होती हैं, वहां त्वरित प्रतिक्रिया दल (Quick Response Team – QRT) के गठन की आवश्यकता पर आयोग विचार करेगा। ये दल आपात स्थिति में तत्काल सहायता प्रदान करने और जीवन बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। क्यूआरटी का गठन सुनिश्चित करेगा कि किसी भी दुर्घटना की स्थिति में बिना किसी देरी के प्रभावी बचाव कार्य शुरू किया जा सके, जिससे जान-माल के नुकसान को कम किया जा सके और आपातकालीन स्थितियों में बेहतर समन्वय स्थापित हो।
यह न्यायिक जांच राज्य में जल सुरक्षा मानकों को मजबूत करने और भविष्य में ऐसी दुखद घटनाओं को रोकने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगी। राज्य सरकार इस आयोग की रिपोर्ट के आधार पर आवश्यक सुधार और नीतियां लागू करने के लिए प्रतिबद्ध है ताकि जनता की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके और जल पर्यटन को सुरक्षित बनाया जा सके।






