महाराष्ट्र की राजनीति में शिवसेना के वरिष्ठ नेता संजय निरुपम ने कई महत्वपूर्ण राजनीतिक घटनाक्रमों पर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उन्होंने तमिलनाडु में टीवीके पार्टी प्रमुख विजय के मुख्यमंत्री बनने और महाराष्ट्र में ऑटो-टैक्सी चालकों के लिए मराठी भाषा की अनिवार्यता जैसे मुद्दों पर बेबाकी से अपनी राय रखी।
मीडिया से बातचीत करते हुए संजय निरुपम ने कांग्रेस पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि तमिलनाडु में कांग्रेस ने सत्ता की मलाई चखने के लिए वर्षों पुराना डीएमके से अपना गठबंधन एक झटके में तोड़ दिया। कांग्रेस ने अपने पांच विधायकों के साथ टीवीके से नया गठबंधन कर लिया है। निरुपम ने कहा कि कांग्रेस पार्टी की मौजूदा स्थिति यह है कि वह अपने दम पर सरकार बनाने में अक्षम है। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि पिछले पचास सालों से तमिलनाडु में कांग्रेस सत्ता से दूर है और इस दौरान पार्टी ने ऐसा कोई उल्लेखनीय कार्य नहीं किया, जिससे वह अपनी सरकार बना सके। संजय निरुपम के अनुसार, कांग्रेस ‘बैसाखी के सहारे’ चल रही है; पहले वह डीएमके के साथ थी और अब उसने टीवीके का दामन थाम लिया है।
संजय निरुपम ने TCS मामले में लगाए गंभीर आरोप
नासिक के टीसीएस मामले पर संजय निरुपम ने बेहद गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि “मुसलमान इस देश को निशाने पर लेकर बैठे हैं।” निरुपम ने दावा किया कि नासिक के टीसीएस कार्यालय में ‘कॉर्पोरेट जिहाद’ हुआ है, जहां कार्यरत मुस्लिम कर्मचारियों ने दो बेटियों का यौन उत्पीड़न किया और उन्हें धर्म परिवर्तन के लिए अभियान चलाया। उन्होंने इस प्रवृत्ति को “जिहादी प्रवृत्ति के मुसलमान” करार दिया और असदुद्दीन ओवैसी को ऐसे “जिहादियों का नेता” बताया।
शिंदे गुट के इस नेता ने अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए कहा कि “जिहादी मुसलमानों ने यह तय कर रखा है कि देश को हरा करना है।” उन्होंने टीसीएस प्रकरण में पकड़ी गई निदा खान को संरक्षण देने का आरोप एआईएमआईएम पर लगाया। निरुपम ने कहा कि जब पूरे देश और महाराष्ट्र पुलिस ने एआईएमआईएम का विरोध किया, तब ओवैसी ने यह आरोप लगा दिया कि उन्हें निशाना बनाया जा रहा है। हालांकि, संजय निरुपम ने स्पष्ट किया कि “इस देश के राष्ट्रवादी मुसलमानों को कोई निशाना नहीं बना रहा है, लेकिन जिहादियों से सरकार सख्ती से निपटेगी।”
विधानसभा चुनाव परिणामों पर संजय निरुपम का बयान
विधानसभा चुनाव परिणामों पर भी संजय निरुपम ने अपनी राय व्यक्त की। असम और पश्चिम बंगाल सहित अन्य राज्यों के चुनाव नतीजों पर उन्होंने कहा कि “विपक्षी दल मतदाताओं की बदलती भावनाओं को स्वीकार करने के बजाय अपनी हार के लिए ईवीएम और मतदाता सूची संबंधी मुद्दों को जिम्मेदार ठहराते हैं, जो पूरी तरह से गलत है।” निरुपम ने विशेष रूप से पश्चिम बंगाल का जिक्र करते हुए कहा कि इस बार हार का ठीकरा एसआईआर पर फोड़ा गया है। उन्होंने विपक्ष और ममता बनर्जी को सलाह दी कि उन्हें अपनी हार के वास्तविक कारणों की तलाश करनी चाहिए, क्योंकि “आज का मतदाता पूरी तरह से बदल गया है और वह सही सरकार का चुनाव कर रहा है।”
महाराष्ट्र में ऑटो और टैक्सी चालकों के लिए मराठी भाषा की अनिवार्यता के मुद्दे पर भी संजय निरुपम ने जानकारी दी। उन्होंने बताया कि महाराष्ट्र सरकार इस संबंध में एक प्रस्ताव पर पुनर्विचार कर रही है, क्योंकि लिखित परीक्षा में असफल होने पर परमिट रद्द होने की आशंका को लेकर कई आपत्तियां दर्ज कराई गई थीं। परिवहन मंत्री प्रताप सरनाइक की पहल का उल्लेख करते हुए निरुपम ने कहा कि चालकों को मराठी भाषा को समझने और उसमें संवाद करने में सहायता प्रदान करने के लिए एक सरल मराठी शिक्षण पुस्तिका तैयार की गई है।






