नर्मदा नदी सहित आसपास के घाटों में तेजी से हो रहे रेत के अवैध खनन और मत्स्याखेट पर मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने रोक लगा दी है। चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा और जस्टिस विनय सराफ की डिवीजन बेंच ने मछुआरा कल्याण एवं मत्स्य विकास विभाग, कलेक्टर, एसपी ईओडब्ल्यू व जिला माइनिंग अधिकारी और अन्य को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।
जबलपुर निवासी याचिकाकर्ता अभिषेक कुमार सिंह ने जनहित याचिका दायर करते हुए कोर्ट को बताया कि नर्मदा और खिरहनी घाट में अवैध रेत खनन और महाशीर मछली लगातार पकड़ी जा रही है। अधिवक्ता अंशुमान सिंह ने याचिकाकर्ता की ओर से दलील दी कि महाशीर को राज्य मछली का दर्जा प्राप्त है। नर्मदा और खास तौर पर खिरहनी घाट में इसका अवैध रूप से मत्स्याखेट किया जा रहा है।
ब्रीडिंग के मौसम में महाशीर मछली का बेख़ौफ़ मत्स्याखेट
याचिकाकर्ता ने कहा कि खासतौर पर ब्रीडिंग के मौसम में महाशीर मछली को पकड़ने पर पूरी तरह से रोक लगनी चाहिए, क्योंकि एक रिपोर्ट के अनुसार लगातार आखेट के कारण मछली की ये प्रजाति विलुप्त हो रही है, इसके संरक्षण के प्रयास के बावजूद अवैध मत्स्यखेट और अवैधानिक रेत खनन से महाशीर प्रजाति पर बड़ा खतरा मंडरा रहा है।
2011 में मध्यप्रदेश सरकार ने महाशीर को राज्य मछली का दर्जा दिया
याचिका में कहा गया कि वर्ष 2011 में मध्यप्रदेश सरकार ने महाशीर को राज्य मछली का दर्जा दिया था, लेकिन उसके संरक्षण के लिए कोई प्रभावी कदम नहीं उठाए गए। उल्टा प्रशासनिक लापरवाही के कारण उसके शिकार को खुली छूट मिल गई है। नर्मदा नदी में अवैध खनन और जैव विविधता को नुकसान पहुंचाने वाले मामलों पर हाई कोर्ट की यह सख्ती पर्यावरण संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है। खासतौर पर महाशीर जैसी दुर्लभ प्रजाति की सुरक्षा को लेकर यह आदेश दूरगामी प्रभाव डाल सकता है।






