
MP High Court, Jabalpur
नगर तथा ग्राम निवेश (टाउन एंड कंट्री प्लानिंग, Town and Country Planning) विभाग के ज्वाइंट डायरेक्टर अमित गजभिए हाई कोर्ट की अवमानना के दोषी पाए गए। बीते दिनों अमित गजभिए वीडियो कांफ्रेसिंग के दौरान हाई कोर्ट में बिस्तर पर बगैर पेंट पहने उपस्थित हुए। कोर्ट ने उनके आचरण को न्यायालय की गरिमा और शिष्टाचार के विपरीत मानते हुए नोटिस जारी किया है। हाई कोर्ट ने राज्य सरकार को चार सप्ताह के भीतर अनुशासनात्मक कार्रवाई की रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।
दरअसल 27 अक्टूबर 2026 को अदालत में हुई सुनवाई के दौरान अधिकारी वीडियो कांफ्रेंसिंग के दौरान बिस्तर पर लेटे हुए और केवल अंडरपैंट पहने दिखाई दिए। आदेश में दर्ज विवरण के अनुसार वह कैमरे के सामने शर्ट के बटन बंद करते हुए भी नजर आए। अदालत ने इस आचरण को न्यायिक मर्यादा के प्रतिकूल माना। याचिकाकर्ता के अधिवक्ता दिनेश उपाध्याय ने बताया कि मामला मेसर्स GSB कंस्ट्रक्शन से संबंधित भूमि उपयोग विवाद से जुड़ा है।
इस मामले में रख रहे थे शासन का पक्ष
याचिकाकर्ता के अनुसार, मास्टर प्लान में संबंधित भूमि का उपयोग आवासीय था, जबकि राजस्व अथवा विभागीय रिकॉर्ड में उसे औद्योगिक दर्ज किए जाने का मुद्दा सामने आया। अदालत के समक्ष प्रस्तुत तथ्यों के अनुसार, 3 अक्टूबर 2025 को जबलपुर के ज्वाइंट डायरेक्टर द्वारा रिकॉर्ड में सुधार के संबंध में भोपाल को सिफारिश भेजी गई थी। इसके बावजूद बाद में पारित आदेश पर अदालत ने सवाल उठाए और उसे महज दिखावा बताते हुए टिप्पणी की।
वीडियो कांफ्रेंसिंग में केवल अंडरपैंट पहने शामिल हो गये
इसी मामले की कोर्ट में सुनवाई होना था, जिसमें कि टीएनसीपी के ज्वाइंट डायरेक्टर को कोर्ट में उपास्थित होकर या फिर वीडियो कांफ्रेसिंग के जारिए मौजूद रहने कहा गया था। वीडियो कांफ्रेंसिंग के दौरान वे केवल अंडरपैंट पहने और शर्ट के बटन लगाते दिखाई दिए। हाई कोर्ट ने ज्वाइंट डायरेक्टर को नोटिस जारी कर पूछा है कि उनके कथित आचरण के लिए उनके विरुद्ध आपराधिक अवमानना की कार्रवाई क्यों न शुरू की जाए।
चार सप्ताह में मांगा जवाब
अदालत ने ज्वाइंट डायरेक्टर अमित गजभिए को चार सप्ताह के भीतर अपना जवाब प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं । अदालत ने इस मामले में न्यायालय की गरिमा, शिष्टाचार और न्यायिक कार्यवाही के दौरान अधिकारियों से अपेक्षित आचरण के महत्व को रेखांकित किया। हालांकि, अवमानना संबंधी नोटिस जारी होना अपने आप में अंतिम दोषसिद्धि नहीं है। सुनवाई में याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता दिनेश उपाध्याय और साकेत उपाध्याय हाजिर हुए। राज्य सरकार की ओर से उप महाधिवक्ता स्वप्निल गांगुली मौजूद थे।
वंदना झा की रिपोर्ट

