अब हर छह साल में होगा नर्मदा गौ कुम्भ,मंत्री तरुण भनोट

अब हर छह साल में होगा नर्मदा गौ कुम्भ,मंत्री तरुण भनोट

जबलपुर।संदीप कुमार।

पूरे देश के साधु संतों की भावना है कि माँ नर्मदा के ग्वारीघाट तट पर हर छह साल के अंतराल में नर्मदा गौ कुम्भ का आयोजन हो इसके लिए कैबिनेट में अलग से कुम्भ के लिए बजट का प्रस्ताव भी पास कर दिया गया है इसलिए अब हर छह साल में नर्मदा गौ कुम्भ का आयोजन होगा यह कहना है मध्यप्रदेश के वित्त मंत्री तरुण भनोट का।जबलपुर में आज साधु संतों के बीच पहुँचकर खुले मंच से उन्होंने यह घोषणा की है साथ ही उन्होंने कहा कि जहाँ जहाँ भगवान राम के पग पड़े थे वहां पर राम वन गमन पथ का निर्माण किया जाए।

साधु संतों के आदेश को राज्य सरकार ने मान लिया है और जैसा आदेश संतो का होगा वह सरकार को मंजूर होगा।वित्त मंत्री ने यह भी कहा कि लंबे समय से विपक्ष शोर कर रही है कि श्री लंका में सीता माता के मंदिर निर्माण को सरकार भूल गई है तो ऐसा कतई नही है।आगामी 5 मार्च को मुख्यमंत्री के निर्देश पर मैं स्वयं श्री लंका जाऊंगा और वहाँ पर मंदिर की नींव रखी जायेगी।उन्होंने मंच से सहज स्वीकार किया कि बिना धर्म और संतो के आशीर्वाद से सरकार नही चलती है इसलिए 3 मार्च को मुख्यमंत्री कमलनाथ भी नर्मदा गौ कुम्भ में शामिल होकर संतो का आशीर्वाद लेंगे।उन्होंने यह भी कहा कि विपक्ष चाहे जो भी बोले उसकी परवाह नही है क्योंकि पहले मुँह चलाने वाली सरकार थी और अब काम करने वाली कमलनाथ की सरकार है।

Gaurav Sharma
लेखक के बारे में
Gaurav Sharma

निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
Follow Us :GoogleNews