बकरा बाजार में सोशल डिस्टेंस की उड़ी धज्जियां, संक्रमण का बढ़ा खतरा

बकरा बाजार में सोशल डिस्टेंस की उड़ी धज्जियां, संक्रमण का बढ़ा खतरा

जबलपुर| संदीप कुमार| मुस्लिम का मुख्य पर्व बकरीद माना जाता है| इस पर्व में भी कोरोना वायरस के चलते मुस्लिम समुदाय के लोग बकरीद पर्व में बकरा खरीदने के लिए बाजार में उमड़े। कोरोना वायरस के चलते लगे लॉक डाउन और उसके बाद सोशल डिफेंस ने जबलपुर के बकरा बाजार को पूरी तरह से ध्वस्त कर दिया।

लॉक डाउन के बाद भी बकरा बाजार में लगी भीड़
कोरोना वायरस के कारण जबलपुर में लॉकडाउन लगा हुआ है इसके अलावा शासन के दौरान निर्देश है कि सोशल डिस्टेंस का भी पालन किया जाए पर जबलपुर के मादार टेकरी से लेकर चार खंबा तक लगे बकरा बाजार में सोशल डिस्टेंस की धज्जियां उड़ाई गई। लोग खुलकर बाजार में उतरे और ना ही सोशल डिस्टेंस का पालन किया गया और ना ही लोगों ने मास्क पहना। कहा जा सकता है कि यहां पर इन लोगों की लापरवाही से आने वाले समय में एक बार फिर कोरोना संक्रमण बड़ी संख्या में फैल सकता है।

कांग्रेस ने जिला प्रशासन की लापरवाही पर उठाए सवाल
सोशल डिस्टेंस के निर्देश और लॉकडाउन के बाद भी जबलपुर के मदार टेकरी से लेकर चार खंबा तक जिस तरह से बकरा बाजार शाम को साढ़े सात बजे के बाद भी सजा रहा उसका कांग्रेस ने भारी विरोध किया है। साथ ही पुलिस प्रशासन की कार्यवाही पर कई तरह के सवाल खड़े कर दिया है। कांग्रेस कार्यकर्ता विष्णु विनोदिया का कहना है कि कोरोना संक्रमण होने के बाद इस तरह से भीड़ का बाजार में उतरना कोरोना संक्रमण को बढ़ावा देने वाला है। कहा जा सकता है कि अगर जिला प्रशासन की इस तरह से लापरवाही होती रही तो आने वाले समय में जबलपुर में तेजी से कोरोना वायरस के पॉजिटिव केसों की संख्या में इजाफा होगा।

Gaurav Sharma
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निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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