नेताजी सुभाषचंद्र बोस की 125 वीं जयंती के अवसर पर जबलपुर में होंगे कार्यक्रम, राष्ट्रपति भी आएंगे!

नेताजी सुभाषचंद्र बोस की 125 वीं जयंती के अवसर पर जबलपुर में होंगे कार्यक्रम, राष्ट्रपति भी आएंगे!

जबलपुर, संदीप कुमार| नेताजी सुभाष चंद्र बोस की 125वीं जयंती (Shubhash Chandra Bose Jayanti) के उपलक्ष्य पर देश के कोलकाता से शुरू हुआ कार्यक्रम अब अगले चरण में जबलपुर (Jabalpur) पहुंचेगा, जहां 1 मार्च से लेकर 6 मार्च तक संस्कारधानी में हुए त्रिपुरी अधिवेशन को चित्रकला के माध्यम से प्रदर्शित किया जाएगा, यह घोषणा केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन राज्य मंत्री प्रहलाद पटेल ने आज जबलपुर की|

7 मार्च को राष्ट्रपति होंगे कार्यक्रम में शामिल
एक पत्रकार वार्ता को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि जिस वक्त जबलपुर संस्कारधानी में त्रिपुरी अधिवेशन हुआ था उस वक्त नेता जी ने अध्यक्ष पद पर कब्जा जमाते हुए कांग्रेस का प्रतिनिधित्व किया था.। इसी त्रिपुरी अधिवेशन पर केंद्रित चित्रकला प्रदर्शनी में देशभर के जाने-माने कलाकार शिरकत करेंगे | उन्होंने बताया कि आगामी 6 और 7 मार्च को महामहिम राष्ट्रपति का जबलपुर दौरा संभावित है इस लिहाज से 7 मार्च को कई विकास कार्यो का भूमि पूजन भी वे करेंगे|

सिंगौरगढ़ में 26 करोड़ रु से होगा उन्नय्यन कार्य
केंद्रीय मंत्री पटेल ने बताया कि दमोह जिले के सिंगोरगढ़ जो की रानी दुर्गावती का एक महत्वपूर्ण स्थान माना जाता है वहां 26 करोड़ की लागत से उन्नयन कार्य किया जाएगा जिस का भूमि पूजन महामहिम के हाथों से होगा इसके साथ ही 10 करोड़ की लागत से अन्य भूमि पूजन कार्य ,महात्मा गांधी की प्रतिमा का अनावरण और जबलपुर में प्रस्तावित एएसआई के कार्यलय का महामहीम शुभारंभ करेंगे|

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निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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