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श्रम कानून का विरोध शुरू, ओएफके फैक्ट्री के बाहर कर्मचारियों का प्रदर्शन, 12 को 1 घंटे की हड़ताल,

Reported by:Sandeep Kumar|Edited by:Atul Saxena
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महिलाओं को रात्रि पाली कार्य में लगाया जाने का भी प्रावधान इस संशोधन के तहत् दिया गया है जो कि पूर्णतः अनुचित है कार्य के घंटे पौने 45 से बढ़ाकर 48 किया जा रहा है इस संशोधन के तहत् आरक्षण भी समाप्त किया जा रहा है।
श्रम कानून का विरोध शुरू, ओएफके फैक्ट्री के बाहर कर्मचारियों का प्रदर्शन, 12 को 1 घंटे की हड़ताल,

jabalpur protest

केन्द्र एवं राज्य सरकार के समस्त कर्मचारी सम्पूर्ण देश में लेबर लॉ में परिवर्तन एवं संसोधन के विरोध में आंदोलनरत हैं, केन्द्रीय श्रम संगठनों द्वारा इसके विरोध में एक दिवसीय हड़ताल पर जा रही है ऑल इंडिया डिफेंस इम्पलाईज फेडरेशन ने इस हड़ताल का समर्थन करते हुए चार दिवसीय विरोध प्रदर्शन किया है ए.आई.डी.ई.एफ. से संबंद्ध ओ.एफ. के. लेबर यूनियन भी लेबर लॉ के ससोधन पर गहरा विरोध दिखाते हुए आंदोलन कर रही है।

फैडरेशन के संगठन मंत्री अर्नब दास गुप्ता ने कहा है कि श्रम कानूनों में परिवर्तन पूर्णतः मजदूर विरोधी है जिसे मजदूर वर्ग कभी स्वीकार नहीं करेगा उनका कहना है कि श्रम कानूनों में बदलाव के तहत् कार्य के घंटे जो कि लंबे संघर्ष के बाद 08 घंटे सुनिश्चित किया गया था उसे बढ़ा कर अब 12 घंटे किया जा रहा है इसके तहत् अब कोई भी स्थाई नियुक्ति निर्धारित नहीं है अब केवल समयकाल आधारित नियुक्ति दी जाएगी।

इस नियम के तहत् न्यूनतम वेतन सुनिश्चित नहीं किया गया है, महिला कर्मचारियों को दिया जाने वाला बाल्य देखभाल अवकाश (सी.सी.एल.) को संशोधित कर वर्क फार्म होम किया जा रहा है महिलाओं को रात्रि पाली कार्य में लगाया जाने का भी प्रावधान इस संशोधन के तहत् दिया गया है जो कि पूर्णतः अनुचित है कार्य के घंटे पौने 45 से बढ़ाकर 48 किया जा रहा है इस संशोधन के तहत् आरक्षण भी समाप्त किया जा रहा है।

ट्रेड यूनियन का अधिकार समाप्त करने का प्रयास 

इस संशोधन के तहत् ट्रेड यूनियन का अधिकार जो कि ब्रिटिश काल से दिया गया है उसे समाप्त करने का प्रयास किया जा रहा है औद्योगिक विवाद अधिनियम 1947 जो ट्रेड यूनियन और किसी भी उद्योग में कार्यरत् व्यक्तिगत श्रमिकों का भारतीय श्रम कानूनों को नियंत्रित करता है, इस अधिनियम का मुख्य उद्देश्य यह है कि औद्योगिक विवादों का न्यायसंगत उचित और शांतिपूर्ण तरीके से निपटारा करने के लिये एक उपयुक्त मशीनिरी प्रदान करना, नियोजक और कर्मचारियों के बीच मित्रता एवं अच्छे संबंध स्थापित करना कर्मचारियों को जबरदस्ती कामबंदी, छटनी गलत तरीके से बर्खास्तगी और उत्पीड़न से राहत प्रदान करना साथ ही सुलह समाधान और मध्यस्ता के प्रावधान है।

श्रमिक वर्ग के अधिकारों पर डाका 

परन्तु श्रम कानूनों के संशोधन के बाद ये तमाम अधिनियमों को समाप्त कर नये चार श्रम कानून बनाये जा रहे हैं जो कि ये तमाम अधिकार जो औद्योगिक अधिनियम 1947 के तहत् श्रमिक वर्ग को दिया जाता था उसे समाप्त किया जा रहा है अब किसी भी श्रम संगठन को मान्यता हेतु 51 प्रतिशत से अधिक मत प्राप्त करने होगें जो कि वर्तमान परिस्थिति में असंभव है इसका सीधा मतलब है कि यूनियन गतिविधियों को पूर्ण तरीके से समाप्त करना।
इसके विरोध में तथा हड़ताल के समर्थन में ओ.एफ.के. लेबर यूनियन द्वारा बैज धारण, नारेबाजी, लंच बहिष्कार, द्वार सभा साथ ही 12 फरवरी को निर्माणी में सभी कर्मचारी 01 घंटे निर्माणी में विलंब से प्रवेश कर विरोध प्रदर्शन करेगी।

Atul Saxena
लेखक के बारे में
पत्रकारिता मेरे लिए एक मिशन है, हालाँकि आज की पत्रकारिता ना ब्रह्माण्ड के पहले पत्रकार देवर्षि नारद वाली है और ना ही गणेश शंकर विद्यार्थी वाली, फिर भी मेरा ऐसा मानना है कि यदि खबर को सिर्फ खबर ही रहने दिया जाये तो ये ही सही अर्थों में पत्रकारिता है और मैं इसी मिशन पर पिछले तीन दशकों से ज्यादा समय से लगा हुआ हूँ.... पत्रकारिता के इस भौतिकवादी युग में मेरे जीवन में कई उतार चढ़ाव आये, बहुत सी चुनौतियों का सामना करना पड़ा लेकिन इसके बाद भी ना मैं डरा और ना ही अपने रास्ते से हटा ....पत्रकारिता मेरे जीवन का वो हिस्सा है जिसमें सच्ची और सही ख़बरें मेरी पहचान हैं .... View all posts by Atul Saxena
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