मध्य प्रदेश में भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त कार्रवाई देखने को मिली है। इसी कड़ी में आर्थिक अन्वेषण ब्यूरो (EOW) ने शुक्रवार को गाडरवाड़ा नगर पालिका के प्रभारी मुख्य नगर पालिका अधिकारी (CMO) योगेंद्र कुमार ढिमोले के ठिकानों पर छापा मारा। जांच एजेंसी के अनुसार अब तक की कार्रवाई में करीब 2.36 करोड़ रुपये की अनुपातहीन संपत्ति का खुलासा हुआ है। वहीं अधिकारियों का कहना है कि जांच अभी जारी है और आगे और भी जानकारी सामने आ सकती है।
दरअसल जबलपुर EOW की टीम ने गाडरवाड़ा और लखनादौन स्थित संपत्तियों पर एक साथ कार्रवाई की है। EOW के एसपी अनिल विश्वकर्मा ने बताया कि योगेंद्र ढिमोले के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने की शिकायत मिली थी। प्रारंभिक जांच में शिकायत सही पाए जाने के बाद भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया और तीन अलग-अलग टीमों ने एक साथ सर्च ऑपरेशन शुरू किया गया है।
EOW रैड में क्या-क्या मिला?
वहीं जांच के दौरान गाडरवाड़ा स्थित आवास से करीब एक करोड़ रुपये कीमत का मकान मिला है। वहीं इसके अलावा 45 हजार रुपये नकद, लगभग 61 लाख रुपये कीमत का घरेलू सामान, 209 ग्राम सोने के आभूषण, 671 ग्राम चांदी के आभूषण, एक महिंद्रा थार और एक फोर्ड फिगो कार भी मिली। जांच एजेंसी के मुताबिक योगेंद्र ढिमोले और उनके परिजनों के नाम पर आठ अलग-अलग बैंक खाते भी संचालित होने की जानकारी मिली है। इन खातों में जमा राशि का पूरा विवरण अभी जुटाया जा रहा है।
तीन एकड़ कृषि भूमि की भी जानकारी मिली
वहीं लखनादौन स्थित संपत्ति की जांच में करीब 30 लाख रुपये का मकान, एक प्लॉट, दुकान, तीन एकड़ कृषि भूमि, ट्रैक्टर, ट्रॉली और मिक्सर मशीन भी मिली है। EOW का कहना है कि यह पूरा आकलन अभी शुरुआती स्तर का है। दस्तावेजों की जांच, बैंक खातों की जानकारी और लॉकर खुलने के बाद संपत्ति का वास्तविक मूल्य और बढ़ सकता है। फिलहाल बरामद दस्तावेजों और वित्तीय रिकॉर्ड की जांच जारी है।
आय से अधिक संपत्ति मामले में आगे क्या होगा?
दरअसल EOW अधिकारियों के अनुसार छापेमारी के दौरान मिले दस्तावेजों, बैंक रिकॉर्ड, निवेश और संपत्ति से जुड़े सभी कागजात का मिलान अधिकारी की वैध आय से किया जाएगा। लॉकर खोला जाना शेष है। कार्रवाई के दौरान और अधिक संपत्ति मिलने की संभावना है। यदि जांच में यह साबित होता है कि संपत्ति वैध आय के मुकाबले अधिक है और उसका संतोषजनक स्रोत नहीं बताया जा सकता, तो मामले में आगे अभियोजन की कार्रवाई की जाएगी।






