तो क्या केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद पटेल की पहल पर सरकार ने लिया ये फैसला

तो क्या केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद पटेल की पहल पर सरकार ने लिया ये फैसला

जबलपुर//संदीप कुमार।

दमोह सांसद और केंद्रीय सांस्कृतिक पर्यटन मंत्री प्रह्लाद पटेल का जबलपुर से गहरा नाता है। यही वजह है कि केंद्रीय मंत्री के मित्र डॉ प्रकाश दुबे, विजय जयसवाल ने अपने साथियों की पहल पर एक पत्र उन्हें लिखकर यह मांग की थी कि अगर जनता कर्फ्यू को सफल बनाना है तो सुबह और शाम तीन-तीन घंटे रामायण एवं महाभारत का प्रसारण किया जाए जिससे कि जनता इस सीरियल को देखने के लिए अपने घरों पर ही रहेगी और जनता कर्फ्यू का पालन भी होगा। केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद पटेल को गुंजन कला सदन का यह सुझाव काफी पसंद आया लिहाजा उन्होंने सूचना एवं प्रसारण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर तक गुंजन कला सदन की बात पहुँचाई और उन्होंने भी उनके सुझाव को अमल में लाया और 28 मांर्च से एक-एक घंटे राष्ट्रीय चैनल पर रामायण-महाभारत प्रसारण करने की बात कही।

अब इसके बाद राष्ट्रीय चैनल दूरदर्शन पर 28 मांर्च से रामायण-महाभारत का प्रसारण होगा। सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने रामायण एवं महाभारत का प्रसारण करने के सुझाव को मान लिया है। प्रकाश जावड़ेकर ने ट्वीट कर बताया है कि जनता की डिमांड को देखते हुए यह फैसला लिया गया है कि 28 मार्च से रोजाना सुबह और शाम एक-एक घंटे रामायण और महाभारत का प्रसारण किया जाएगा।

गौरतलब हो कि प्रदेश के जबलपुर जिले के गुंजन कला सदन के डॉ प्रकाश दुबे, विजय जयसवाल और उनके सदस्यों ने केंद्रीय सांस्कृतिक मंत्री प्रह्लाद पटेल को एक पत्र लिखकर मांग की थी कि जनता कर्फ्यू को काफी हद तक सफल बनाने में रामायण और महाभारत कारगार साबित होगा।कोरोना वायरस के चलते इसके प्रसारण होने से बच्चे-बड़े और बुजुर्ग घरों पर ही रहेंगे।इतना ही नही आज की पीढ़ी भी इस ग्रन्थ के महत्व को समझेंगी। साथ ही सड़को में लगने वाली भीड़ भी कम होगी।

Gaurav Sharma
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निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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