ये वॉटर गर्ल करती हैं पानी में योग,अब तक कई लोगों को दिया प्रशिक्षण

ये वॉटर गर्ल करती हैं पानी में योग,अब तक कई लोगों को दिया प्रशिक्षण

जबलपुर/संदीप कुमार

शरीर को स्वस्थ बनाए रखने में तो योग मददगार है ही साथ ही ये मानसिक स्वास्थ्य के लिये भी बहुत कारगर है। योगाभ्यास करना किसी भी उम्र के व्यक्ति के लिए लाभदायक है लेकिन लॉक डाउन में योगा ट्रेनर भी बेरोजगार है।

जबलपुर की वाटर गर्ल-पानी मे करती है योग
योग ट्रेनर के रूप में मध्यप्रदेश में ख्यति कमा चुकी गंगा चक्रवर्ती को वाटर गर्ल के नाम से भी जाना जाता है। गंगा चक्रवर्ती पानी में भी योग करने में निपुण है। गंगा मेट्स के साथ साथ पानी मे भी योगा करना पसंद करती है।

वाटर गर्ल गंगा ने बताया कि आज योग करना सबके लिए जरूरी है और जो योग करता है वो आज पूरी तरह स्वस्थ है। उन्होंने बताया कि आज के युग मे योग कंपलसरी हो गया है और हर व्यक्ति को योग करना ही चाहिए भले ही वह 15 मिनट निकालकर सूर्य नमस्कार ही करे। वहीं उन्होंने पानी के योग को भी बेहतर बताया है। योग ट्रेनर ने बताया कि पुराने समय में भी लोग कहते थे कि नदी तालाब में नहाओ तो स्वस्थ रहते हैं।

लॉक डाउन में योगा ट्रेनर हो गए है बर्बाद
लॉक डाउन के दौरान योगा ट्रेनर्स भी परेशान हैं। योग टीचर गंगा ने बताया कि बीते ढाई माह से लगे लॉक डाउन के चलते योगा क्लास पूरी तरह से बंद है, ऐसे में वो लोग जो कि पूरी तरह से सिर्फ योगा क्लास पर ही निर्भर है उनके सामने एक बड़ी समस्या पैदा हो गई है। लिहाजा योगा ट्रेनर ने केंद्र एवं राज्य सरकार से मांग की है कि उनकी तरफ भी ध्यान दिया जाए।

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निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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