दिल्ली में 26 जनवरी को हुई हिंसा में लाल किले को भारी नुकसान, गायब हैं बेशकीमती कलश

दिल्ली में 26 जनवरी को हुई हिंसा में लाल किले को भारी नुकसान, गायब हैं बेशकीमती कलश

जबलपुर, संदीप कुमार| 26 जनवरी को कृषि कानून बिल (Farm Law) के खिलाफ देश की राजधानी दिल्ली (Delhi) में जो हिंसा हुई, उस हंगामे में आर्थिक क्षति के साथ-साथ देश की धरोहर को भी नुकसान हुआ है, जिसकी भड़पाई किसी भी कीमत पर नही हो सकती, ये कहना है केंद्रीय पर्यटन मंत्री प्रह्लाद पटेल (Prahlad Patel) का|

केंद्रीय मंत्री ने बताया कि किसानों के हंगामे के दौरान लाल किले (Red Fort Delhi) को खासा नुकसान पहुँचा है, लाल किले का टिकिट काउंटर और फुटपाथ को क्षति पहुंची है| इसके अलावा भीड़ ने लाल किले में लगी लाइट को जहाँ जहाँ तक वह पहुँची तो उसको नुकसान पहुँचाया गया पर सबसे बड़ी बात ये है कि लाल किले के कलश को भी खासा नुकसान इस आंदोलन से हुआ है|

केंद्रीय पर्यटन मंत्री ने कहा कि लाल किले में जो कलश लगे हुए थे उनमें तीन कलश को नुकसान पहुँचाया गया था जिसमे की एक कलश तो मिल गया पर दो कलश अभी तक नही मिले है| गुम हुए कलश की भरपाई पैसों से नही हो सकती है ये अमूल्य धरोहर है जिसके गुम होने की शिकायत दिल्ली पुलिस से की गई है|

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पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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