बेंगलुरु: कर्नाटक में कांग्रेस सरकार के भीतर सत्ता को लेकर हलचल तेज हो गई है। लोकसभा चुनाव से पहले और राज्य में उपचुनाव के बाद मंत्रिमंडल में फेरबदल की मांग जोर पकड़ रही है। कई वरिष्ठ विधायक मंत्री पद के लिए अपनी दावेदारी पेश कर रहे हैं, जिससे मुख्यमंत्री सिद्धारमैया पर दबाव बढ़ गया है। इस बीच, लगभग 40 विधायकों का एक गुट दिल्ली जाकर पार्टी आलाकमान से मिलने की योजना बना रहा है।
इस पूरी राजनीतिक खींचतान पर राज्य के गृह मंत्री जी. परमेश्वर ने एक महत्वपूर्ण बयान दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि मंत्रिमंडल में किसी भी तरह का बदलाव या विस्तार पूरी तरह से पार्टी आलाकमान और मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के विवेक पर निर्भर करता है।
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‘मंत्री पद की इच्छा रखना स्वाभाविक’
विधायकों द्वारा मंत्री पद की मांग किए जाने पर गृह मंत्री ने कहा कि आकांक्षाएं रखना स्वाभाविक है और इसमें कुछ भी गलत नहीं है।
“मंत्री पद की मांग करने में कोई बुराई नहीं है। विधायकों द्वारा अवसर मांगने में क्या गलत है? अवसर देना है या नहीं, यह आलाकमान का फैसला है। यह मुख्यमंत्री का विवेक है। आलाकमान इन मामलों पर गौर करेगा और आगे क्या करना है, इसका फैसला लेगा।”- जी. परमेश्वर, गृह मंत्री, कर्नाटक
उनका यह बयान ऐसे समय में आया है जब पार्टी के कई विधायक, विशेषकर तीन से अधिक बार चुनाव जीत चुके वरिष्ठ नेता, मंत्री पद के लिए लामबंदी कर रहे हैं। हाल ही में ऐसे ही विधायकों के एक समूह ने मुख्यमंत्री सिद्धारमैया से मुलाकात कर उन्हें मंत्रिमंडल में शामिल करने की अपील की थी।
उपचुनाव के बाद दिल्ली कूच की तैयारी
सूत्रों के अनुसार, करीब 40 विधायक 9 अप्रैल को होने वाले उपचुनाव के बाद 11 अप्रैल को दिल्ली जाने की योजना बना रहे हैं। उनका मकसद पार्टी के शीर्ष नेतृत्व से मिलकर यह सुनिश्चित करना है कि फेरबदल के दौरान उनमें से कम से कम 20 विधायकों को मंत्री बनाया जाए। यह कदम पार्टी के भीतर बढ़ते असंतोष और सत्ता-साझेदारी की बढ़ती मांग को दर्शाता है।
कांग्रेस के अंदरूनी कलह पर बीजेपी का हमला
इस बीच, विपक्षी दल बीजेपी ने कांग्रेस पर निशाना साधा है। कर्नाटक बीजेपी अध्यक्ष बी.वाई. विजयेंद्र ने दावा किया कि कांग्रेस के भीतर सत्ता का संघर्ष और आंतरिक कलह चरम पर है। उन्होंने यहां तक कहा कि मुख्यमंत्री का बदला जाना “अपरिहार्य” है।
विजयेंद्र ने कहा, “कांग्रेस सरकार में जारी संकट के मद्देनजर मुख्यमंत्री पद में बदलाव अपरिहार्य है। राज्य में लोग परेशान हैं। किसान संकट में हैं। युवा भी नाखुश हैं और इस सरकार के खिलाफ हैं। अगर उपचुनावों का ऐलान न होता तो स्थिति पूरी तरह बदल चुकी होती।” उन्होंने विश्वास जताया कि सिद्धारमैया सरकार की जनविरोधी नीतियों के कारण आगामी उपचुनावों में बीजेपी को जीत मिलेगी।