गदग, कर्नाटक: कर्नाटक की राजनीति में उस वक्त हड़कंप मच गया, जब लोकायुक्त पुलिस ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए भारतीय जनता पार्टी (BJP) के विधायक को रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया। गदग जिले के शिरहट्टी विधानसभा क्षेत्र से विधायक डॉ. चंद्रू लमानी को एक ठेकेदार से 5 लाख रुपये की घूस लेते हुए पकड़ा गया। यह गिरफ्तारी लोकायुक्त द्वारा बिछाए गए एक सुनियोजित जाल का नतीजा थी।
इस हाई-प्रोफाइल गिरफ्तारी ने राज्य में भ्रष्टाचार के खिलाफ चल रही मुहिम को एक नई दिशा दी है। 2023 के विधानसभा चुनाव में जीत दर्ज करने वाले लमानी अनुसूचित जाति (SC) के एक प्रमुख प्रतिनिधि हैं और उनकी गिरफ्तारी की गूंज पूरे राज्य में सुनाई दे रही है।
कैसे बिछाया गया गिरफ्तारी का जाल?
यह पूरी कार्रवाई प्रथम श्रेणी के ठेकेदार विजय पुजारी द्वारा दर्ज कराई गई एक औपचारिक शिकायत के आधार पर की गई। पुजारी ने लोकायुक्त अधिकारियों को बताया था कि लघु सिंचाई विभाग (Minor Irrigation Department) के एक रिटेनिंग वॉल के निर्माण कार्य के सिलसिले में विधायक चंद्रू लमानी उनसे 11 लाख रुपये की भारी रिश्वत की मांग कर रहे थे।
शिकायत मिलने के बाद लोकायुक्त पुलिस ने मामले को गंभीरता से लिया और एक ट्रैप लगाने की योजना बनाई। योजना के तहत, जैसे ही ठेकेदार विजय पुजारी ने रिश्वत की पहली किश्त के तौर पर 5 लाख रुपये नकद विधायक को सौंपे, पहले से तैयार भ्रष्टाचार निरोधक टीम ने धावा बोल दिया। अधिकारियों ने डॉ. लमानी को रंगे हाथों पकड़ लिया, जिससे पूरा सौदा विफल हो गया।
विधायक के दो सहयोगी भी गिरफ्तार
लोकायुक्त पुलिस ने इस मामले में सिर्फ विधायक को ही नहीं, बल्कि उनके दो निजी सहायकों (PA) को भी गिरफ्तार किया है। इनकी पहचान मंजूनाथ वाल्मीकी और गुरुनाइक के रूप में हुई है। माना जा रहा है कि ये दोनों भी इस अवैध सौदेबाजी में शामिल थे। फिलहाल, लोकायुक्त की टीम तीनों आरोपियों से गहन पूछताछ कर रही है ताकि इस मामले से जुड़े अन्य पहलुओं का भी खुलासा हो सके।
इस घटना ने एक बार फिर सरकारी परियोजनाओं में राजनीतिक हस्तक्षेप और भ्रष्टाचार के मुद्दे को गरमा दिया है। लोकायुक्त पुलिस वित्तीय लेन-देन और परियोजना से जुड़े सभी रिकॉर्ड खंगाल रही है, जिससे इस तरह के नेटवर्क को खत्म कर जनता का विश्वास बहाल किया जा सके।






