बेंगलुरु: कर्नाटक में सत्तारूढ़ कांग्रेस के भीतर मुख्यमंत्री पद को लेकर लंबे समय से चल रहा विवाद एक बार फिर गरमा गया है। इस बार, राज्य के वरिष्ठ नेता और गृह मंत्री जी परमेश्वर ने सार्वजनिक बयानबाजी पर कड़ा रुख अपनाते हुए अपनी ही पार्टी के नेताओं को चेतावनी दी है। उन्होंने साफ कहा, “अब बहुत हो गया। इसे तुरंत रोकना होगा।”
शुक्रवार को पत्रकारों से बात करते हुए परमेश्वर ने इस मुद्दे पर लगातार हो रही अटकलों पर नाराजगी जाहिर की। उन्होंने जोर देकर कहा कि पार्टी की सारी ऊर्जा अंदरूनी कलह के बजाय शासन और विकास कार्यों पर केंद्रित होनी चाहिए। उनका यह बयान ऐसे समय में आया है जब मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार के खेमों के बीच तनाव फिर से बढ़ गया है।
‘आलाकमान से करूंगा बात’
जी परमेश्वर ने कहा कि वह इस मुद्दे को खत्म करने के लिए पार्टी आलाकमान से भी बात करेंगे। उन्होंने बताया कि पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे पहले ही सभी को चुप रहने का निर्देश दे चुके हैं, लेकिन इसके बावजूद बयानबाजी जारी है।
“हमारे कांग्रेस अध्यक्ष (मल्लिकार्जुन खरगे) ने तो यहां तक कह दिया है कि सभी को अपना मुंह बंद रखना चाहिए। वह इससे ज्यादा सख्त नहीं हो सकते। बावजूद इसके, नेता और विधायक इस मसले पर लगातार बयानबाजी कर रहे हैं, जो कि सरकार के लिए सही नहीं है।”- जी परमेश्वर, गृह मंत्री, कर्नाटक
उन्होंने आगे कहा, “लोगों ने हमें एक अलग उम्मीद के साथ चुना है। हमें प्रशासन पर ध्यान देना चाहिए। लेकिन हम सब इस मुद्दे पर खुलकर बयान दे रहे हैं, जो ठीक नहीं है। मुझे उम्मीद है कि आलाकमान यह सब देख रहा है और सही समय पर सही फैसला लेगा।”
क्यों बढ़ा है हालिया विवाद?
पार्टी के अंदर यह तनाव हाल ही में तब और बढ़ गया जब मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के बेटे और विधान परिषद सदस्य (MLC) यतींद्र सिद्धारमैया ने दावा किया कि उनके पिता अपना 5 साल का कार्यकाल पूरा करेंगे। इस बयान के बाद उपमुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार के समर्थक भी मुखर हो गए।
शिवकुमार का खेमा लगातार यह कह रहा है कि उनके नेता ही अगले मुख्यमंत्री बनेंगे और बड़ी संख्या में विधायकों का समर्थन उनके साथ है। गौरतलब है कि कांग्रेस सरकार ने पिछले साल 20 नवंबर को अपने पांच साल के कार्यकाल का आधा रास्ता पूरा कर लिया है, जिसके बाद से नेतृत्व परिवर्तन की अटकलें तेज हो गई हैं।





