कटनी: मध्य प्रदेश के कटनी जिले में भ्रष्टाचार के खिलाफ लोकायुक्त पुलिस ने एक और बड़ी कार्रवाई की है। गुरुवार को जबलपुर लोकायुक्त की टीम ने जिला पंचायत कार्यालय की स्थापना शाखा में तैनात लेखपाल सत्येंद्र सोनी को 5,000 रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया। आरोपी एक निलंबित सचिव की बहाली की फाइल आगे बढ़ाने के बदले 50,000 रुपये कीमत का वीवो प्रो 70 मोबाइल फोन मांग रहा था।
यह कार्रवाई ग्राम सचिव आशीष कुमार दुबे की शिकायत पर की गई। आशीष को 2024 में एक मामले में सह-आरोपी बनाए जाने के बाद निलंबित कर दिया गया था। अपनी बहाली के लिए जब उन्होंने प्रयास शुरू किए तो आरोपी लेखपाल ने उनकी फाइल रोक दी और रिश्वत की मांग करने लगा।
महंगे मोबाइल से शुरू हुआ रिश्वत का सौदा
लोकायुक्त इंस्पेक्टर बृजमोहन के अनुसार, शिकायतकर्ता आशीष दुबे ने बताया कि लेखपाल सत्येंद्र सोनी शुरू में बहाली के बदले वीवो प्रो 70 मोबाइल फोन पर अड़ा हुआ था, जिसकी कीमत करीब 50 हजार रुपये है। जब सचिव ने इतनी महंगी मांग पूरी करने में असमर्थता जताई और काफी मिन्नतें की, तो आरोपी किस्तों में पैसे लेने के लिए तैयार हो गया।
सौदा तय होने के बाद आशीष ने 23 फरवरी को लोकायुक्त में इसकी शिकायत दर्ज करा दी। शिकायत के सत्यापन के बाद लोकायुक्त की 7 सदस्यीय टीम ने जाल बिछाया और गुरुवार को जैसे ही सचिव ने रिश्वत की पहली किस्त के रूप में 5,000 रुपये लेखपाल को दिए, टीम ने उसे दबोच लिया।
हाईकोर्ट के आदेश को भी कर रहा था नजरअंदाज
फरियादी आशीष कुमार दुबे ने बताया कि निलंबन के बाद उन्होंने अपनी बहाली के लिए माननीय उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया था। न्यायालय ने संबंधित विभाग को 30 दिनों के भीतर मामले का निराकरण करने के निर्देश दिए थे। इसके बावजूद, लगभग एक साल बीत गया, लेकिन आरोपी लेखपाल सत्येंद्र सोनी फाइल को आगे नहीं बढ़ा रहा था और लगातार रिश्वत के लिए दबाव बना रहा था।
कटनी में 9 दिन के अंदर दूसरी बड़ी कार्रवाई
यह घटना कटनी जिले में फैले भ्रष्टाचार की गहराई को दर्शाती है। महज 9 दिनों के भीतर लोकायुक्त द्वारा की गई यह दूसरी बड़ी कार्रवाई है। इससे पहले 17 फरवरी को जल संसाधन विभाग के प्रभारी कार्यपालन यंत्री (EE) व्ही.ए. सिद्दीकी को 20,000 रुपये की रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार किया गया था। सिद्दीकी ने सेवानिवृत्त चौकीदार कुंवर लाल रजक समेत 9 अन्य कर्मचारियों के 8 लाख रुपये के एरियर्स भुगतान के बदले 50,000 रुपये की मांग की थी।






