वनकर्मियों पर हमले के अगले ही दिन 90 हेक्टेयर वन भूमि पर प्रशासन का एक्शन, 30 जेसीबी और 600 से अधिक जवान मैदान में

वन विभाग ने स्पष्ट किया है कि कार्रवाई केवल अतिक्रमण हटाने तक सीमित नहीं रहेगी। भविष्य में दोबारा वन भूमि पर कब्जा न हो, इसके लिए क्षेत्र में स्थायी वॉच टावर, फॉरेस्ट गार्ड के स्थायी सुरक्षा नाके तथा नियमित गश्त की व्यवस्था की जाएगी।
Encroachment removed from Khandwa Forest Department land

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खंडवा जिले की गुड़ी रेंज के आमाखुजरी क्षेत्र में वन विभाग की टीम पर हुए जानलेवा हमले के अगले ही दिन जिला प्रशासन ने अब तक की सबसे बड़ी संयुक्त कार्रवाई शुरू कर दी। वन विभाग, जिला प्रशासन और पुलिस की संयुक्त टीम सोमवार सुबह से बड़े पैमाने पर वन भूमि पर किए गए अवैध अतिक्रमण को हटाने में जुटी हुई है। कार्रवाई के दौरान लगभग 90 हेक्टेयर वन भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराने का लक्ष्य रखा गया है।

इस अभियान के लिए प्रशासन ने व्यापक सुरक्षा और संसाधनों की व्यवस्था की है। मौके पर 30 जेसीबी मशीनें, 600 से अधिक वन विभाग, राजस्व विभाग एवं पुलिस के अधिकारी-कर्मचारी तथा पुलिस जवान तैनात किए गए हैं। इसके अलावा 200 से अधिक शासकीय एवं अन्य वाहन भी कार्रवाई में लगाए गए हैं, जिससे पूरे क्षेत्र को सुरक्षा घेरे में लेकर चरणबद्ध तरीके से अतिक्रमण हटाया जा रहा है।

13 से अधिक अवैध झोपड़ियां हटाई गईं

संयुक्त टीम ने आमाखुजरी क्षेत्र में वन भूमि पर अवैध रूप से बनाई गई 13 से अधिक झोपड़ियों को जेसीबी की सहायता से ध्वस्त कर दिया। प्रशासन का कहना है कि वर्षों से वन भूमि पर किए गए अवैध कब्जों को हटाकर पूरे क्षेत्र को पुनः वन विभाग के नियंत्रण में लिया जा रहा है। अधिकारियों के अनुसार यह कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी और किसी भी प्रकार के नए अतिक्रमण को सख्ती से रोका जाएगा।

हमले के बाद प्रशासन ने दिखाई सख्ती

गौरतलब है कि रविवार को इसी क्षेत्र में अतिक्रमण हटाने पहुंची वन विभाग की टीम पर अतिक्रमणकारियों ने अचानक हमला कर दिया था। हमलावरों ने गोफन, पत्थरों और लाठियों से वनकर्मियों पर हमला किया, जिसमें 8 वनकर्मी घायल हो गए थे। कई कर्मचारियों को गंभीर चोटें आई थीं और उन्हें उपचार के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया।इस घटना के बाद प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लेते हुए 9 नामजद आरोपियों सहित कई अन्य लोगों के विरुद्ध प्रकरण दर्ज किया है। पुलिस आरोपियों की तलाश में जुटी हुई है और आगे की वैधानिक कार्रवाई जारी है।

वरिष्ठ अधिकारियों की मौजूदगी में चल रही कार्रवाई

कार्रवाई की निगरानी स्वयं डीएफओ राकेश कुमार डामोर और अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक महेंद्र तारनेकर कर रहे हैं। वहीं कलेक्टर ऋषभ गुप्ता और पुलिस अधीक्षक अगम जैन भी मौके पर पहुंचे और पूरी कार्रवाई का निरीक्षण किया। अधिकारियों ने सुरक्षा व्यवस्था, कानून-व्यवस्था और अतिक्रमण हटाने की प्रक्रिया का जायजा लेते हुए आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।

वन भूमि की सुरक्षा के लिए बनेगी स्थायी व्यवस्था

वन विभाग ने स्पष्ट किया है कि कार्रवाई केवल अतिक्रमण हटाने तक सीमित नहीं रहेगी। भविष्य में दोबारा वन भूमि पर कब्जा न हो, इसके लिए क्षेत्र में स्थायी वॉच टावर, फॉरेस्ट गार्ड के स्थायी सुरक्षा नाके तथा नियमित गश्त की व्यवस्था की जाएगी। विभाग का उद्देश्य वन भूमि की सुरक्षा सुनिश्चित करना और अवैध कब्जों पर स्थायी रोक लगाना है। डीएफओ राकेश कुमार डामोर ने कहा कि वन भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराने का अभियान पूरी गंभीरता और कानून के दायरे में संचालित किया जा रहा है। साथ ही भविष्य में किसी भी प्रकार के अवैध कब्जे को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

इस व्यापक कार्रवाई को वन विभाग पर हुए हमले के बाद प्रशासन की सबसे बड़ी और सख्त कार्रवाई माना जा रहा है। जिले में यह संदेश देने का प्रयास है कि सरकारी भूमि पर अवैध कब्जा और शासकीय कर्मचारियों पर हमला किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जाएगा तथा कानून के अनुसार कठोर कार्रवाई की जाएगी।

Atul Saxena
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पत्रकारिता में तीन दशक से अधिक का अनुभव.

पत्रकारिता मेरे लिए एक मिशन है, हालाँकि आज की पत्रकारिता ना ब्रह्माण्ड के पहले पत्रकार देवर्षि नारद वाली है और ना ही गणेश शंकर विद्यार्थी वाली, फिर भी मेरा ऐसा मानना है कि यदि खबर को सिर्फ खबर ही रहने दिया जाये तो ये ही सही अर्थों में पत्रकारिता है और मैं इसी मिशन पर पिछले तीन दशकों से ज्यादा समय से लगा हुआ हूँ.... पत्रकारिता के इस भौतिकवादी युग में मेरे जीवन में कई उतार चढ़ाव आये, बहुत सी चुनौतियों का सामना करना पड़ा लेकिन इसके बाद भी ना मैं डरा और ना ही अपने रास्ते से हटा ....पत्रकारिता मेरे जीवन का वो हिस्सा है जिसमें सच्ची और सही ख़बरें मेरी पहचान हैं .... View all posts by Atul Saxena →
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