मध्य प्रदेश की राजनीति और प्रशासन से जुड़ी एक बड़ी खबर ने शनिवार को अचानक लोगों की धड़कनें तेज कर दीं। मुख्यमंत्री के दौरे के दौरान सब कुछ सामान्य चल रहा था, कार्यक्रम खत्म हो चुका था और हेलीकॉप्टर भोपाल के लिए उड़ान भरने ही वाला था। लेकिन टेकऑफ के कुछ ही सेकंड बाद जो हुआ, उसने वहां मौजूद लोगों को हिला दिया।
हेलीकॉप्टर जैसे ही ऊपर उठा, वह अचानक असंतुलित होता दिखाई दिया। वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि मशीन पहले बाईं ओर झुकी, फिर पीछे की ओर हल्की मूवमेंट हुई और कुछ सेकंड तक स्थिर स्थिति नहीं बन पाई। उस पल मैदान में मौजूद सुरक्षा कर्मियों से लेकर आम लोग तक स्तब्ध रह गए। हालांकि, पायलट ने संयम नहीं खोया और आखिरकार स्थिति संभाल ली।
टेकऑफ के दौरान अचानक क्यों डगमगाया हेलीकॉप्टर?
घटना उस समय की है जब मुख्यमंत्री का हेलीकॉप्टर खंडवा जिले के पंधाना से उड़ान भर रहा था। कार्यक्रम समाप्त होने के बाद मुख्यमंत्री भोपाल के लिए रवाना हो रहे थे। हेलीकॉप्टर ने जैसे ही उड़ान भरी, कुछ सेकंड बाद वह अपनी दिशा में स्थिर नहीं रह सका।
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, हेलीकॉप्टर अचानक थोड़ा पीछे की ओर खिसकता हुआ सा दिखाई दिया। धूल का गुबार भी तेजी से उठने लगा, जिससे कुछ समय के लिए दृश्यता कम हो गई। इस स्थिति ने वहां मौजूद सभी लोगों को घबरा दिया।
हालांकि, विमानन विशेषज्ञों के अनुसार, हेलीकॉप्टर टेकऑफ के दौरान हवा की दिशा, जमीन की धूल और मशीन के संतुलन पर निर्भर करता है। यदि हवा की दिशा अचानक बदल जाए या धूल ज्यादा उड़ने लगे तो पायलट को तुरंत निर्णय लेना पड़ता है। यही स्थिति यहां भी देखी गई। इस दौरान लगभग 36 सेकंड तक स्थिति असामान्य रही, जो किसी भी वीआईपी उड़ान के लिए बेहद संवेदनशील समय माना जाता है।
पायलट की सूझबूझ से टला बड़ा संकट
घटना का सबसे अहम पहलू यह रहा कि पायलट ने घबराहट में कोई जल्दबाजी नहीं दिखाई। उन्होंने हेलीकॉप्टर की गति को तुरंत नियंत्रित किया ताकि धूल और ज्यादा न उड़े और दृश्यता बनी रहे।
जानकारों के मुताबिक, अगर धूल ज्यादा उठती है तो पायलट को जमीन का अंदाजा लगाना मुश्किल हो सकता है, जिससे जोखिम बढ़ सकता है। इसलिए हेलीकॉप्टर की स्पीड कम की गई और मशीन को नियंत्रित तरीके से स्थिर किया गया।
कुछ सेकंड तक स्थिति नियंत्रित करने के बाद हेलीकॉप्टर फिर से संतुलन में आया और सुरक्षित रूप से उड़ान भर गया। इसके बाद मुख्यमंत्री सुरक्षित रूप से भोपाल पहुंच गए। इस पूरी घटना ने यह भी दिखाया कि आपात स्थिति में प्रशिक्षित पायलट की भूमिका कितनी महत्वपूर्ण होती है।
प्रशासन ने क्या कहा, क्या थी असली वजह?
घटना के बाद सोशल मीडिया पर तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गईं। कुछ लोगों ने इसे तकनीकी खराबी बताया, तो कुछ ने इसे गंभीर हादसे से जोड़ दिया। लेकिन जिला प्रशासन ने स्थिति स्पष्ट की।
खंडवा पुलिस अधीक्षक ने बताया कि हेलीकॉप्टर में कोई तकनीकी खराबी नहीं थी। टेकऑफ के समय मशीन उस दिशा में नहीं थी, जहां उसे होना चाहिए था। हवा की दिशा और धूल के कारण पायलट ने स्पीड कम कर स्थिति को नियंत्रित किया।
उन्होंने कहा कि यह एक सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा था, लेकिन दृश्य रूप से यह स्थिति असामान्य लग सकती है। सुरक्षा के लिहाज से पायलट ने हेलीकॉप्टर को थोड़ी देर नीचे लाकर नियंत्रित किया और फिर सुरक्षित उड़ान भरी। इस बयान के बाद स्थिति स्पष्ट हुई कि यह कोई बड़ा तकनीकी संकट नहीं बल्कि टेकऑफ के दौरान उत्पन्न परिस्थिति थी।





