खंडवा में गुरु पूर्णिमा का पर्व इस बार सिर्फ धार्मिक आस्था तक सीमित नहीं रहा, बल्कि पूरे शहर ने इसे सेवा और सद्भाव के महोत्सव में बदल दिया। दरअसल दादाजी धूनीवाले दरबार में दर्शन के लिए दूर-दूर से पहुंचे श्रद्धालुओं का स्वागत स्थानीय लोगों ने पूरे अपनापन के साथ किया। शहर की सड़कों से लेकर सेवा शिविरों तक हर जगह श्रद्धा और सहयोग का माहौल देखने को मिला।
दरअसल दादाजी धूनीवाले दरबार में सुबह से ही श्रद्धालुओं की लंबी कतारें लगी रहीं। प्रशासन, सामाजिक संस्थाओं और स्थानीय नागरिकों ने मिलकर भीड़ प्रबंधन, यातायात और अन्य जरूरी व्यवस्थाओं को संभाला। बड़ी संख्या में स्वयंसेवकों ने दर्शन के लिए आने वाले श्रद्धालुओं को मार्गदर्शन देने के साथ भोजन, पेयजल और स्वास्थ्य सुविधाएं भी उपलब्ध कराईं। गुरु पूर्णिमा के मौके पर धार्मिक आयोजन के साथ सामाजिक सहयोग की यह तस्वीर खंडवा की पहचान बनकर सामने आई।
खंडवा गुरु पूर्णिमा में 700 सेवा स्टॉल बने श्रद्धालुओं की सबसे बड़ी ताकत
वहीं इस वर्ष गुरु पूर्णिमा पर खंडवा शहर में 700 से अधिक सेवा स्टॉल और भंडारों का संचालन किया गया। इन स्टॉलों पर किसी एक संस्था नहीं, बल्कि सामाजिक संगठनों, व्यापारिक समूहों, धार्मिक मंडलों और आम नागरिकों ने मिलकर सेवा की जिम्मेदारी संभाली। श्रद्धालुओं के लिए हलवा-पूरी, सब्जी, खिचड़ी, चाय, नाश्ता, फल, ठंडा पानी और अन्य खाद्य सामग्री निशुल्क वितरित की गई। कई स्थानों पर मेडिकल कैंप भी लगाए गए, जहां प्राथमिक उपचार और दवाइयों की व्यवस्था रही।
दरअसल दूर-दराज से पैदल यात्रा कर पहुंचे श्रद्धालुओं के लिए विश्राम स्थल भी बनाए गए, ताकि उन्हें यात्रा के दौरान किसी तरह की परेशानी न हो। आयोजन के दौरान स्वच्छता बनाए रखने के लिए नगर निगम की टीमें लगातार सक्रिय रहीं। प्लास्टिक के उपयोग को कम करने और कचरे के बेहतर प्रबंधन पर भी विशेष ध्यान दिया गया। बड़ी संख्या में स्वयंसेवकों ने श्रद्धालुओं से स्वच्छता बनाए रखने की अपील की, जिससे धार्मिक आयोजन के साथ सामाजिक जिम्मेदारी का संदेश भी गया।
आस्था के साथ सामाजिक एकता भी बनी पहचान
वहीं गुरु पूर्णिमा पर दादाजी धूनीवाले दरबार में उमड़ी भीड़ ने एक बार फिर यह दिखाया कि यह आयोजन सिर्फ धार्मिक आस्था का केंद्र नहीं, बल्कि सामाजिक समरसता का भी बड़ा उदाहरण है। विभिन्न समाजों, संस्थाओं और समुदायों के लोगों ने बिना किसी भेदभाव के सेवा कार्यों में हिस्सा लिया। कई जनप्रतिनिधि भी अलग-अलग सेवा शिविरों में पहुंचे और श्रद्धालुओं को भोजन परोसने, प्रसाद वितरण तथा अन्य व्यवस्थाओं में सहयोग करते दिखाई दिए।
दरअसल श्रद्धालुओं की सुविधा को देखते हुए रेलवे ने भी विशेष मेमू ट्रेन चलाने का निर्णय लिया, जिससे आसपास के क्षेत्रों से आने वाले यात्रियों को राहत मिली। वहीं प्रशासन ने सुरक्षा, ट्रैफिक और स्वास्थ्य सेवाओं के लिए अतिरिक्त इंतजाम किए थे। आयोजन के दौरान लाखों लोगों की मौजूदगी के बावजूद व्यवस्थाएं काफी हद तक सुचारु रहीं। दादाजी धूनीवाले दरबार में दर्शन के बाद अधिकांश श्रद्धालुओं ने इसे आध्यात्मिक अनुभव के साथ सेवा और मानवीय सहयोग का अनूठा संगम बताया।






