अक्सर माता-पिता बच्चों की हर बात को मासूमियत समझकर टाल देते हैं। जैसे झूठ बोलना, गुस्से में सामान फेंकना, या बिना वजह बहस करना। शुरुआत में ये सब मामूली बातें लगती हैं, लेकिन अगर इन्हें अनदेखा कर दिया जाए तो धीरे-धीरे ये आदतें बच्चों के व्यवहार का हिस्सा बन जाती हैं।
सही पेरेंटिंग सिर्फ बच्चों को डांटने या रोकने तक सीमित नहीं होती, बल्कि इसमें समझदारी, धैर्य और सही समय पर सही गाइडेंस ज़रूरी है। अगर पेरेंट्स ध्यान न दें, तो यही छोटी गलतियां बड़े होकर उनके आत्मविश्वास, रिश्तों और भविष्य की सफलता पर गहरा असर डाल सकती हैं।
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बच्चों की गलत आदतों को समय रहते पहचानना क्यों है जरूरी?
1. झूठ बोलना
झूठ बोलना बच्चों में सबसे आम आदतों में से एक है। कई बार बच्चे छोटी-छोटी बातों को छिपाने के लिए झूठ बोलते हैं। शुरुआत में पेरेंट्स इसे हल्के में ले लेते हैं, लेकिन यही आदत आगे चलकर गंभीर झूठ बोलने का आधार बन जाती है।
एक्सपर्ट्स मानते हैं कि बच्चे झूठ बोलना अक्सर सज़ा से बचने या पेरेंट्स को खुश करने के लिए सीखते हैं। पेरेंट्स को चाहिए कि वे बच्चों से सच्चाई बोलने पर भरोसा जताएं और उन्हें प्रोत्साहित करें। बार-बार झूठ पकड़कर डांटने से बेहतर है कि बच्चे को समझाया जाए कि सच बोलने पर माहौल कितना आसान और भरोसेमंद बनता है।
2. गुस्से में सामान फेंकना या चिल्लाना
कई बच्चे गुस्से में खिलौने तोड़ना, किताबें फेंकना या जोर से चिल्लाना शुरू कर देते हैं। यह आदत बचपन में ही कंट्रोल न की जाए तो आगे चलकर गुस्सैल स्वभाव में बदल सकती है।
मनोवैज्ञानिक कहते हैं कि बच्चों का गुस्सा असल में उनकी भावनाओं को व्यक्त करने का तरीका है, जिसे पेरेंट्स को सही दिशा देनी चाहिए। पेरेंट्स को बच्चे को शांत करने और बात समझाने का अभ्यास करना चाहिए, न कि तुरंत गुस्से में प्रतिक्रिया देनी चाहिए। उन्हें बताना ज़रूरी है कि गुस्से को नियंत्रित करने से ही समस्याओं का हल निकलता है।
3. बार-बार बहस करना या न सुनना
कई बच्चे छोटी-छोटी बातों पर बहस करते हैं या पेरेंट्स की बातें अनसुनी कर देते हैं। इसे अक्सर पेरेंट्स ‘जिद’ मानकर छोड़ देते हैं। लेकिन यही आदत धीरे-धीरे बच्चों को अनुशासन से दूर कर देती है।
एक्सपर्ट्स का कहना है कि पेरेंट्स को बच्चों को सुनना भी चाहिए। कई बार बच्चे बहस इसलिए करते हैं क्योंकि वे खुद को अनसुना महसूस करते हैं। एक ओपन और पॉजिटिव बातचीत बच्चों के व्यवहार में सुधार लाती है। पेरेंट्स को यह समझना चाहिए कि बच्चों को नियम समझाना जरूरी है, लेकिन उनकी भावनाओं को इग्नोर करना गलत है।
सही पेरेंटिंग का तरीका
- बच्चों के साथ भरोसेमंद रिश्ता बनाना सबसे पहली सीढ़ी है।
- उन्हें गलत आदतों के लिए डांटने के बजाय समझाना और सही विकल्प देना बेहतर होता है।
- बच्चों की अच्छी आदतों पर तारीफ करने से उनका आत्मविश्वास बढ़ता है और वे गलतियों को सुधारने की कोशिश करते हैं।